शुगर डेटिंग – क्या आप जानते हैं कि शुगर डेटिंग क्या है?

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क्या आप जानते हैं कि डेटिंग में आजकल नया क्या चल रहा है? मैं किसी नई मोबाइल एप्लीकेशन की बात नहीं कर रहा हूँ। मैं बात कर रहा हूँ, शुगर डैडी और शुगर बेबी डेटिंग की। क्या आप इनके बारे में कुछ जानते हैं?

हम सब ने अंगूर खट्टे हैं वाली कहानी तो पढ़ी ही होगी। इस कहानी का सबसे बड़ा सबक यही था कि इंसान के पास जो चीज़ नहीं होती या जो चीज़ वह नहीं पा सकता, उसे व्यर्थ कह कर अपनी नाकामयाबी को छिपा लेता है। लेकिन कहीं न कहीं, हम भी यह मानते हैं कि अंगूर हमेशा खट्टे नहीं होते अर्थात कमी चीज़ों में नहीं, हम में ही होती है। ऐसा ही कुछ डेटिंग की गलिओं में भी हो रहा है। डेटिंग में आजकल शुगर डैडी और शुगर बेबी नामक एक नया ट्रेंड चल रहा है, जिसमे छोटी उम्र की लडकियां बड़ी उम्र के मर्दों के साथ सिर्फ इसलिए (जिस्मानी) ताल्लुकात बनाती हैं, ताकि उनको बड़ी उम्र के मर्दों से आर्थिक लाभ मिल सके।

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शुगर डेटिंग क्या होती है

इस डेटिंग का एकमात्र मकसद है, “पैसो से शारीरिक सुख खरीदना।” दूसरे शब्दों में, आप मुझे पैसे दो, मैं आपको ऐश दूंगी। हम जानते हैं कि पैसे के बिना जीवित रहना कितना मुश्किल है, खासकर जब खर्च बेहिसाब हो रहा हो और आय के साधन सीमित हो। कुछ लोगों को छोड़कर, बाकि लोग इस तरह के व्यवहार को आपत्तिजनक ही नहीं, बल्कि अपनी गरिमा से समझौता भी मानते हैं। ऐसा नहीं है कि यह सिर्फ पश्चिमी देशों में हो रहा है, अब तो इस प्रकार की डेटिंग भारत में भी आम ही होती है।

वास्तव में, जवान लड़कियां यह अच्छी तरह से जानती है कि उनके आसपास बहुत से ऐसे बड़ी उम्र के मर्द है, जिनके पास पैसे के अलावा कुछ नहीं है। वह जानती हैं कि मर्दों का यह वर्ग खूबसूरत और नौजवान लड़कियों से दोस्ती करने और संबंध बनाने के लिए बैचैन रहता है। लेकिन उम्र, शरीर, चेहरे या किसी और वजह से आई हीन-भावना के कारण, वह आगे नहीं बढ़ पाते। अगर आप भी ऐसी ही मर्दों की क्लास में आते हैं (जो इस प्रकार की इच्छाएं रखते हैं), तो आपके पास दो रास्ते हैं – या तो यह मान लें कि अंगूर खट्टे हैं और शांति से बैठ जाएं, या फिर शुगर बेबी डेटिंग की तरफ कदम बढ़ा लें।

शुगर डेटिंग वेश्यावृति से अलग है

कुछ लोग इसे वेश्यावृति मानते हैं। इसमें भी कोई आशंका नहीं कि शुगर डेटिंग को साधारण डेटिंग की तरह नहीं देखा जाता। लेकिन विषय के जानकारों के मुताबिक यह डेटिंग वेश्यावृति से अलग है। जहाँ वेश्यावृति में साथी हर घंटे के बाद बदलते रहते हैं, शुगर डेटिंग में ऐसा नहीं होता। यह एक ऐसे रिश्ते की तरह है, जिसमें बड़ी उम्र के मर्द और कम उम्र की लड़कियां एक दूसरे से (गुप्त रूप से) तब तक जुड़े रहते हैं, जब तक दोनों का स्वार्थ सिद्ध हो रहा है।

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यह डेटिंग केवल और केवल पैसे के इर्द-गिर्द ही घूमती है। जहाँ मर्द अपने बैंक खातों का मुंह खोल देते हैं, वही लड़कियां अपने यौवन का सौदा कर लेती है। मर्दों की डिमांड, लड़कियों की डिमांड के पुरे होने पर ही ध्यान में लाई जाती है अर्थात जब तक मनी है, तब तक हनी है।

शुगर डेटिंग से संबंधित एक वेबसाइट के मुताबिक, शुगर डेटिंग के उपयोगकर्ताओं की संख्या कुछ ही सालों में लगभग 1.9 मिलियन से ज़्यादा हो गई है।

अगर आप भी ऐसी डेटिंग से जुड़ने के बारे में सोच रहें हैं, तो ध्यान रखें, आपको ऐसी लड़कियां इंटरनेट पर ही मिलेंगी। अब सवाल यह उठता है कि शुगर डेटिंग सिर्फ इंटरनेट पर ही क्यों होती है, क्लबों या होटलों में क्यों नहीं? इस बात का सीधा सा जवाब है कि एक तो यह खूबसूरत लड़कियां आर्थिक तौर पर मज़बूत नहीं होती और दूसरे यह इन संबंधों को छुपाए रखना चाहती है अर्थात सब के सामने स्वीकार नहीं करती।

शुगर डेटिंग के मामले भारत में भी बढ़ते जा रहें हैं। हालांकि, लिव-इन-रिलेशनशिप की तरह, शुगर डेटिंग को भी लोगों की सहमति मिलना असंभव ही है। कोई शक नहीं कि यह सभ्य समाज की निशानी नहीं है, पर यह बदलते समाज का एक ऐसा सच है, जो हमें आज नहीं तो कल, स्वीकार करना ही पड़ेगा।

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