शादी और सगाई के बीच का समय कैसे बिताया जाए

सगाई और शादी के दिन के बीच का अंतर असली संघर्ष से पहले एक अभ्यास सत्र मैच की तरह है।

5400
READ BY
Photo Credit: JoanaLopes / Bigstockphoto
Read this article in English
यह लेख हिन्दी में पढ़ें।
Sukhdeep Singh

Sukhdeep Singh

Write Something To Right Something

Passionate about playing with words. Sukhdeep is a Post Graduate in Finance. Besides penning down ideas, he is an expert online marketing consultant and a speaker.

शादी और सगाई के बीच के समय को कुछ लोग बहुत अच्छा मानते हैं। लेकिन, वही कुछ लोग यह भी मानते हैं कि शादी और सगाई के बीच का समय जितना ज्यादा होगा, उतना ही तनाव और रिश्ते के टूटने की संभावनाएं बढ़ जाती हैं। इस विषय में मैं अपने एक मित्र का अनुभव आपसे सांझा करना चाहूंगा।

मेरा नाम राजन है। कंपनी के कानूनी सलाहकार होने के बावजूद जो हमेशा चर्चा में व्यस्त रहता है, जिस समय मैं और मेरी पत्नी सगाई के वक़्त पहली बार मिले थे, तो मेरे मुंह में शब्द नहीं थे।

फिर मैंने थोड़ा होंसला किया और बात शुरू की।

“क्या आप इस झट मंगनी पट ब्याह वाले तरीके से खुश हैं? मैं सोच रहा था कि उसका जवाब न में ही होगा। लेकिन, उसने ना नहीं बोली और मुझे न बोलने को कह दिया।

ज़रूर पढ़ें – शादी के लिए सही जीवनसाथी का चुनाव कैसे करें

पहले तो मैं समझ ही नहीं पाया कि उसके ऐसा कहने के पीछे क्या राज़ था। फिर उसने खुद ही कहा, ” क्या आपको नहीं लगता कि हमें सगाई और शादी के बीच थोड़ा समय मिलना चाहिए?” हैरानी तो तब हुई, जब उसने मुझे ही यह समय सीमा मांगने के लिए कह दिया।

मैं मन-ही-मन खुश भी था क्योंकि मैं खुद भी यही चाहता था। फिर, मैं कमरे से बाहर आया और मैंने अपने माता-पिता को कहा, “मुझे लड़की पसंद है, लेकिन क्योंकि यह ज़िन्दगी भर का फैसला होने वाला है, इसलिए मुझे थोड़ा समय चाहिए। कैसा रहेगा अगर हमारी सगाई आज हो जाए, पर शादी कम-से-कम 6 महीने बाद हो?” मेरे परिवार ने इस बात पर पहले थोड़ी आपत्ति जताई, पर बाद में मान गए।

उस दिन के बार मेरे दो नए दोस्त बन गए – पहला, मेरे ऑफिस के नीचे लगा एक आम का पेड़ और दूसरा उसके ठीक नीचे बैठा चाय वाला। मैंने अपना मोबाइल फोन का प्लान भी प्रीपेड से पोस्टपेड करवा लिया और वह भी 4G वीडियो कालिंग प्लान के साथ। अब मेरे लंच-टाइम का 70% हिस्सा फोन पर बातों में जाता था।

फोन पर मैं न तो किसी क्लाइंट से बात होती थी और न ही करियर संबंधी कोई डील। 30 सालों में पहली बार, मैं किसी को यह बताने में व्यस्त था कि मैंने दोपहर के खाने में क्या खाया। हमेशा मुद्दे की बात करने वाला कानूनी सलाहकार आजकल बातों ही बातों में किसी के लिए चाँद-सितारे तोड़ने लगा था।

How To Spend Time Between Engagement and Marriage
How To Spend Time Between Engagement and Marriage

यह सिलसिला ऐसे ही चलता रहा और शादी की तारीख नजदीक आने लगी। इन महीनों में, हमने कई बार चाँद-सितारों की सैर कर ली थी। रूठना और मनाना भी हो चूका था। इन सब फिल्मी ड्रामों के बाद, अब हम दोनों धरती पर वापिस आ चुके थे।

मुझे यह लगता था कि इन सब महीनों में, हम एक दूसरे के बारे में काफी कुछ जान चुके हैं। लेकिन, सच्चाई कुछ और ही थी। बातों ही बातों में वह अक्सर मुझसे पूछा करती थी कि मुझे क्या खाना पसंद है, क्या पहनना पसंद है, कहाँ जाना पसंद है, मैंने किसके ज्यादा करीब हूँ, शादी के बाद इंसान को माता-पिता के साथ रहना चाहिए या नहीं, विदेश जाने को लेकर मेरे क्या विचार है, मैं किन चीजों को लेकर सख्त हूँ, कितना कमा लेता हूँ और कितना खर्चता हूँ। मैं भी, हर बात को बढ़ा-चढ़ा कर बोलता था और उसके लिए एक खुली किताब हो गया था। मैंने उससे हर बात सांझी कर ली थी।

मैं इन सबके बारे में, अपने एक दोस्त से बात किया करता था और वह हमेशा मुझे कहता था कि बोलने से ज्यादा सुना करो। वह मुझे अक्सर कहता था कि, “तुम्हें क्या लगता है कि तुम उसे अपनी पसंद-नापसंद के बारे में बता रहे हो? नहीं, तुम उसे यह बता रहे हो कि तुम्हें कहाँ-कहाँ बदलाव की जरूरत है।”

ज़रूर पढ़ें – भारत में शादीशुदा जोड़ों के नाजायज संबंध एवं इन संबंधों के पीछे के कारण

तुम उसे अपने बारे में इतना सब कुछ बता चुके हो कि तुम्हारी पत्नी बनने से पहले ही वह तुम्हारी हर अच्छी-बुरी आदत के बारे में जान गई है। उसे तुम्हारी हर ताक़त और कमजोरी का अभी से पता चल चूका है। तुमने उसे पहले ही बता दिया है कि कैसे वह तुम्हारी कमजोरियों को वह अपने फायदे के लिए इस्तेमाल कर सकती है।

उस समय मुझ पर मेरे दोस्त की इन चेतावनियों का रत्ती भर भी असर नहीं हुआ था। मुझे लगता था कि मुझ जैसे चालाक इंसान दूसरा कोई है ही नहीं। मैं सोचता था कि मैंने अपनी होने वाली पत्नी को अपने दायरों के बारे में बताया है और पहले ही समझा दिया है कि इन दायरों को तोड़ पाना किसी के लिए भी आसान नहीं होगा।

पर मैं गलत था और मेरा दोस्त सही। सगाई और शादी के बीच 6 महीने का समय मांगना, एक पहले से बनाई गई योजना के तहत ही हुआ था।

जैसे-जैसे शादी की तारीख नजदीक आने लगी थी, मेरी होने वाली पत्नी और उसके परिवार वालों की तरफ से बेकार की मांगे उठने लगी थी।

सगाई के समय मैंने उसे बताया था कि मैं शादी के बाद अपने माता-पिता के साथ ही रहना चाहूंगा और उनके परिवार को इस बात कोई आपत्ति नहीं थी। लेकिन शादी से ठीक एक महीना पहले, मेरे होने वाले ससुर ने मुझसे बातों ही बातों में यह कहना शुरू कर दिया था वह नहीं चाहते कि उनकी बेटी यहाँ से दूसरे शहर जाए। उनके मुताबिक मुझे उनके शहर में या इसके आसपास ही कोई घर लेना पड़ेगा।

शादी से कुछ महीने पहले ही, मेरी पत्नी मेरी आर्थिक स्थिति के बारे में सारी जानकारी पाने की इच्छुक होने लगे थी। एक बार उससे कुछ रोज ठीक से बात न होने पर, मैंने उसे बताया था कि हमने कोई जमीन खरीदी है और मैं कुछ रोज से उसी सौदे में व्यस्त था। मैं तब हक्का-बक्का रह गया, जब वह उस जमीन के कागजों पर खुद का नाम डलवाने की ज़िद्द करने लगी थी।

ज़रूर पढ़ें –5 संकेत जो बताते हैं कि आपका प्रेमी आपसे शादी नहीं करेगा

ऐसी न जाने कितनी बड़ी-छोटी मांगे रोजाना आने लगी थी। छोटी से छोटी बात पर भी वह सगाई रद्द करने की धमकी देते थे। मेरे माँ-बाप नहीं चाहते थे कि यह रिश्ता खराब हो क्योंकि रिश्ता टूटने पर न सिर्फ हमें आर्थिक हानि बल्कि मानसिक परेशानी होनी भी होना तय था।

तब मैं मन ही मन सोचता था कि काश सगाई और शादी की इस मांग को मैंने ठुकरा दिया होता या फिर अपने दोस्त की बात मन ली होती और बोलने से ज्यादा सुना होता। शुरू में, जो सलाह मुझे बेकार लगी थी, अब मुझे वही सलाह न मानने का बहुत दुःख होने लगा था।

क्या इस विषय में आपका कोई प्रश्न हैं ? हमारे विशेषज्ञ से ज़रूर पूंछे।

लोग सही कहते हैं कि सगाई और शादी के बीच ज्यादा अंतराल नहीं होना चाहिए। लेकिन, अगर किसी वजह से यह अंतराल आता है, तो मेरी आपसे सलाह है कि खुली किताब न बनें। जितना हो सके, मुंह बंद और कान खुले रखने की आदत डालें। आर्थिक, सामाजिक और भविष्य से संबंधित किसी भी सवाल का जवाब परिपक्वता (maturity) से दें। बच्चों की तरह फैलने से अच्छा है, समझदार लोगों की तरह शांत रहकर, दूसरे की बातों को ध्यान से सुनना और उनकी मानसिकता को समझना।

अंत में मैं यही कहूंगा कि आपको शादी तब करनी चाहिए जब आपका सिर्फ शरीर ही नहीं, बल्कि दिमाग भी पूरी तरह से विकसित हो गया हो।

Loading...