खोए हुए विश्वास को वापिस कैसे पाएं

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How do I Make my Partner Trust me?
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Sukhdeep Singh

Sukhdeep Singh

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Passionate about playing with words. Sukhdeep is a Post Graduate in Finance. Besides penning down ideas, he is an expert online marketing consultant and a speaker.

हम सभी रिश्तों में गलतियां करते हैं। कुछ ऐसी होती हैं, जो आसानी से माफ़ की जा सकती हैं, और कुछ ऐसी होती हैं, जिनसे ऐसे मानसिक ज़ख्म हो जाते हैं, जो कभी नहीं भरते। अंत में, रिश्तों में विश्वास नहीं रहता।

कभी-कभी, हमारी कोई गलती भी नहीं होती। कई बार हमारे साथी का स्वभाव ही ऐसा होता कि वह बेवजह हम पर शक करता रहता है रिश्तों में दरार आती रहती हैं। चाहे कुछ भी हो, लेकिन एक बेहतर रिश्ते के लिए हमें समस्या की जड़ तक पहुंचने और जड़ से उखाड़ने की हर संभव कोशिश करनी चाहिए। अपने साथी से रिश्ते को सुखद एवं मजबूत बनाए रखने के लिए, हमें इसे तन-मन-धन से निभाना पड़ता है। खोए हुए विश्वास को वापिस पाने के लिए हमें कुछ चीजों का खास रूप से ध्यान रखना पड़ता है।

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खुल के बात करें

इसके दो पक्ष हैं: पहला है विश्वास की कमी के बारे में बात करना।

अपने विचारों को अपने साथी तक पहुँचाये, चाहे आप अविश्वास झेल रहे हैं या आप पर विश्वासघात का आरोप लगाया जा रहा है। अपनी स्थिति स्पष्ट करें और अपने साथी से अपनी मानसिक स्थिति के बारे में खुल के चर्चा करें। खुल के बात करने से न केवल आप समस्या को सुलझा पाएंगे, बल्कि इससे आपके रिश्ते में अंतरंगता और विश्वास भी बढ़ेगा। ऐसा करने से आप दोनों को लगेगा कि आप एक ही समस्या से मिल के लड़ रहें है और इसे सुलझाना चाहते हैं।

दूसरा पक्ष है, गुप्तता रखना।

आपको चीजें गुप्त नहीं रखनी चाहिए। उदाहरण के लिए, मान लें कि आप अपने फोन के नज़दीक नहीं है और जैसे ही आप कमरे में प्रवेश करते हैं, आप देखते हैं कि आपका साथी आपके फोन के बिल्कुल पास है। उसे करीब देखकर, आप तुरंत फोन लपक लेते हैं। आपकी यह हरकत आपके साथी के मन में यकीनन शक पैदा करेगी।

ऐसे स्थिति में (रिश्ते में) विश्वास बना रहना संभव ही नहीं है। हमें अपने संबंधों में रहस्य नहीं रखना चाहिए। सच्चे रिश्ते में झूठ का कोई स्थान नहीं है। झूठ चाहे बड़ा हो या छोटा, इससे रिश्ते की नीव को नुकसान पहुंचाता है।

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भरोसेमंद बनो

भरोसा कमाना सीखें। हमेशा याद रखें जब आप खुद को एक सहायक एवं भरोसेमंद के रूप में स्थापित करते हैं, तो आप पर सभी भरोसा करते हैं। यदि आप कहते हैं कि आप कुछ करेंगे, चाहे वह काम कितना ही छोटा क्यों न हो, हमेशा करें।

उदाहरण के लिए अगर आप अपने साथी से कहते हैं कि आप उसके आने तक खाना बना कर रखेंगे, तो कुछ भी करके अपनी बात को सच साबित करें। यदि आप, इतनी छोटी सी बात पर अपने साथी का विश्वास नहीं जीत सकते, तो किसी बड़े मुद्दे के लिए आपका उसका विश्वास कैसे जीत पाएंगे?हमेशा याद रखे कि विश्वास अक्सर छोटी-छोटी चीजों से ही बनता है। किसी से विश्वास की उम्मीद करने से पहले, उसका विश्वास जीतना सीखें। अगर आप खुद को एक विश्वास करने योग्य इंसान की तरह स्थापित नहीं करेंगे, तो आप किसी अन्य से विश्वास की उम्मीद भी नहीं कर सकते।

साथी के बारे में राय कायम मत करें

यह सच है कि अगर आपका साथी रिश्तों में कोई बहुत बड़ी गलती करके, एक बार आपके विश्वास को तोड़ देता है, तो पुनः विश्वास बनने में काफी समय लगता है। लेकिन, ऐसा होने के बाद भी अगर आप रिश्ते में बने रहते हैं, तो इसके पीछे एक ही कारण होता है कि आप अपने साथी को एक और मौका देना चाहते हैं। दूसरा मौका देना आपके लिए मुश्किल हो सकता है। लेकिन, यहाँ हम यह कहना चाहेंगे कि किसी भी परिणाम पर पहुँचने से पहले तथ्यों को अच्छी तरह से जांच लें क्योंकि यह भी हो सकता कि स्थिति वैसी न हो जैसी आप सोच रहें है। अपने प्रियजन पर संदेह करके, उनको सीधा-सीधा अपराधी घोषित करना गलत है। समस्या के दूसरे पहलु को भी देखें।

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उसी तरह, यदि आपका साथी काम पर या अपने निजी जीवन में उसके द्वारा की गई किसी बड़ी गलती को साझा करने की कोशिश करता है, तो आपको सीधा किसी निष्कर्ष पर पहुंचने एवं निंदा करने के बजाय, उसकी बात को धैर्यपूर्वक सुनना चाहिए। आपको यह समझना चाहिए कि आखिरकार उसने आपसे अपनी गलती मानने की हिम्मत दिखाई है और ऐसा उसने इसीलिए किया है क्योंकि वह आपसे सुधरने का एक मौका चाहता है। अब अगर आप बिना उसे सुने, उसके बारे में कोई निर्णय ले लेंगे, तो ऐसा आपके रिश्ते के लिए ठीक नहीं होगा।

विश्वास की कमी आज कल कई रिश्तों के टूटने का कारण है। ऐसे में, अगर गलती करने पर, हम अपने साथी को दूसरा मौका देने का निर्णय भी लेते हैं और दिल से माफ़ भी नही करते, तो दोनों साथी अपराधबोध में जीते हैं। इस वजह से पूरा रिश्ता अंदर से कमजोर होकर बिखर जाता है।

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