वास्तविक जीवन में सफलता की कहानी – जब आप ना कहना चाहते हों, तो ना ही कहें

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Kumar Sunil

Kumar Sunil

Dreamer & Enthusiast

Creative. One word says it all for Sunil. A engineer, an enthusiastic and conscientious Information Technology consultant by profession, Sunil shares a special interest with entrepreneurship and lifestyle.

हमारी ज़िन्दगी में ऐसा बहुत बार होता है कि हम किसी काम के लिए ना कहना चाहते हैं, लेकिन फिर भी हाँ कह देते हैं और फिर सारी उम्र हमें उसी हाँ का पछतावा रहता है। अधूरे मन से कही गई हाँ ही हमारी नाकामयाबी का कारण बन जाती है।

यकीन मानिए, हर चीज़ के लिए “हाँ” कहना सकरात्मक होने की निशानी नहीं होती क्योंकि अधूरे मन से कही गई हाँ भी हमें नकरात्मकता की और धकेलती रहती है। हमें लगता है कि ना करने पर हम किसी मौके को खो देंगे और यही हमारी सबसे बड़ी भूल होती है। असल में, हम हर चीज़ के लिए “हाँ” बोल कर, पाने से ज़्यादा खो देते हैं। इस लेख के माध्यम से, मैं एक मित्र की एक वास्तविक जीवन की सफलता की कहानी साझा करना चाहूंगा, जिसने मुझे सिखाया है कि जब आप ना कहना चाहते हों, तो हाँ ना कहें।

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मेरा एक बहुत ही करीबी मित्र है, जो पेशे से इलेक्ट्रिकल इंजीनियर है, लेकिन उसे प्रॉपर्टी खरीदने और बेचने में बहुत दिलचस्पी थी। जब भी हम सभी दोस्त एक साथ बैठा करते थे, तो अक्सर वह हमें प्रॉपर्टी में पैसा निवेश करने की सलाह दिया करता था। खैर, फिर उसने कनाडा जाने का मन बना लिया। जब उसने मुझसे इस बारे में ज़िक्र किया, तो मैंने उसके इस विचार का पूरा समर्थन किया। लेकिन, उसके पिता जी (उन दिनों सरकारी अफसर थे) ने पूरा विरोध किया क्योंकि मेरा यह मित्र भी तब एक बहुत अच्छे निजी विभाग में बतौर चीफ इंजीनियर नियुक्त था। उसके पिता जी ने न सिर्फ उसे डांटा, बल्कि मुझे भी गालियां दी।

जब उसने नौकरी से अस्तीफा देना चाहा, तो उसके मालिक ने उसे हर तरह का प्रलोभन भी दिया। लेकिन उसने एक न मानी और कनाडा चला गया। वहां जाने के बाद वह थोड़ा परेशान भी रहा क्योंकि नई जगह में स्थापित होना आसान नहीं होता। बहरहाल, उसने हिम्मत नहीं छोड़ी और एक डिप्लोमा करने के बाद उसे कनाडा की एक मशहूर मोबाइल कंपनी में बतौर सर्किट इंजीनियर की नौकरी मिल गई।

पर उसका सपना अभी भी अधूरा था। वह सुबह से शाम तक कंपनी में बतौर इंजीनियर नौकरी करता, और शाम को रियल-एस्टेट का कोर्स करता। देखते ही देखते उसने रियल-एस्टेट का लाइसेंस भी ले लिया और फिर काम शुरू कर दिया। आज उसे कनाडा गए करीब 10 साल हो गए हैं, और उसने इन 10 सालो में 8 से अधिक खुद के महलों जैसे घर बना लिए हैं। कुछ महीनों पहले, उसने अपने माता-पिता को भी पक्के तौर पर कनाडा बुला लिया है।

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उसके पिता जाने से पहले मुझसे मिलने आए और मुझ से माफ़ी भी मांगने लगे। उन्होंने ने मुझसे कहा कि मैं गलत था और तुम दोनों सही थे। अगर उस वक़्त मेरे बेटे ने मेरी ख़ुशी के लिए या अपने मालिक द्वारा दिए प्रलोभनों में आकर हाँ बोल दिया होता, तो आज वह इतना कामयाब न होता।

नोट – यहां मैं यह नहीं कहना चाहता कि भारत में लोग कामयाब नहीं होते। मैं सिर्फ इतना कहना चाहता हूँ कि अगर इरादा मज़बूत हो, तो ज़िन्दगी में सब कुछ पाना संभव है।

वास्तव में, हमें सही मौके से दूर करने वाला भी एक मौका ही होता है। कामयाब होने के लिए आपको बहुत ही समझदारी से सही मौके की पहचान करनी आनी चाहिए। हमेशा याद रखें कि इस बनावटी और दोगली दुनिया में इंसान जो भी करता है अपने फायदे के लिए ही करता है। अतः, बाद में पछताने से अच्छा है कि आप भी अपने फायदे के मुताबिक “हाँ” या “ना” का चयन करें।

करियर के मामले में आपको स्वार्थी होना ही पड़ता है। इस बात में कोई दो राय नहीं है कि हर इंसान के लिए बेहतरीन ज़िन्दगी की परिभाषा अलग होती है। सुख-सुविधाओं से सम्पूर्ण और (कुछ हद तक) सुरक्षित जीवन के लिए आर्थिक तौर पर प्रबल होना बहुत ज़रूरी होता है। आर्थिक प्रबलता, काफी हद तक, आपके द्वारा ज़िन्दगी में लिए गए फैसलों पर ही निर्भर करती है और आर्थिकता से सम्बंधित फैसले दिल से नहीं दिमाग से लिए जाते हैं।

इस बात से हमेशा याद रखें कि आप यह अंत समय तक नहीं जान पाएंगे कि कौन सा व्यक्ति आपका अंत तक साथ देगा। इसलिए, तब तक आप खुद का साथ दीजिये और बेकार की फिलॉसॉफियों से बचें।