धन और विवाह – पैसे की वजह से टूटते शादीशुदा रिश्ते

लोग कहते हैं कि पैसा हर खुशी नहीं खरीद सकता है। पर मैं कहता हूँ कि ऐसा सोचने वाले लोग गरीब रहकर भी क्या उखाड़ लेते हैं ?

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Money and Marriage Problems
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Kumar Sunil

Kumar Sunil

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अगर मैं कहूं कि आजकल पैसे की वजह से रिश्ते खराब नहीं हो रहें हैं, तो ऐसा कहना झूठ होगा। कुछ लोग कहते हैं कि पैसा सब कुछ नहीं है। हो सकता है कि वह सच बोल रहे हो। फिर भी, पैसे का हमारी खुशी में कुछ तो योगदान जरूर है। जब बात शादीशुदा रिश्ते की होती है, तो धन अहम भूमिका निभाता है।

जरा सोच कर देखें, अगर आपके पैसा न हो, तो क्या आपके परिवार में सुख बना रहेगा? हम भौतिकवाद में जी रहें और यहाँ हम वस्तुओं में खुशी ढूंढ़ते हैं। इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि पैसा हमें अपनी इच्छाओं और जरूरतों को पूरा करने में मदद करता है और इसी पैसे से खरीदी गई वस्तुओं से हमें खुशी भी मिलती है, फिर चाहे वह खुशी कुछ पल ही क्यों न हो। इस लेख में मैं धन और विवाह से जुड़ी समस्यााओं और इनकी वजह से टूट रहे शादीशुदा रिश्तों के बारे में बात करना चाहूंगा। मैं आपको बताने की कोशिश करूंगा कि क्यों एक सुखी रिश्ते के लिए पैसा जरूरी है और क्यों इसके न होने पर रिश्ते बिखर जाते हैं।

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निस्संदेह, अंदर से खुश इंसान ही, दूसरों को खुशी दे सकता है अर्थात अगर हम खुश हैं, तब ही हम दूसरों की खुशी का कारण बन सकते हैं। बहुत लोग कहते हैं कि यदि आप भविष्य की चिंता न करके, वर्तमान में जीने की आदत डाल लेते हैं, तो आप ज्यादा खुश रहते हैं। आपके पास जो कुछ नहीं है उसके बारे में चिंता करने के बजाय, आपके पास जो है, उसके लिए कृतज्ञता दिखाएं। पर मैं आपसे पूछना चाहूंगा कि क्या ऐसा करके आप जीवन भर खुश रह पाएंगे? आखिर कब तक आप समझौतों और समायोजनों से भरा जीवन जीते रहेंगे? कब तक आप अपनी छोटी से छोटी इच्छा को मारते रहेंगे? कब तक आप यही सोचते रहेंगे कि पैसे के पीछे भागना बेकार है?

आइए, इस विषय में हम थोड़ी ईमानदारी से आंकलन करें। किसी भी रिश्ते, विशेष रूप से वैवाहिक, में आजीवन खुशी बनाए रखने के लिए हमें पैसे चाहिए। हम किसी ऐसे व्यक्ति से शादी के बारे में सोच भी नहीं सकते जो सिर्फ बड़ी-बड़ी बातें करना जानता हो, वास्तव में उसके पास फूटी कौड़ी न हो। जब मैं कहता हूं कि शादी में पैसा महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, तो मैं दहेज या किसी अमीर से शादी करने की वकालत नहीं कर रहा हूँ। मैं यह कहना चाहता हूँ कि दोनों भागीदार (पति-पत्नी) मिलकर पैसे कमाएं। इतने सालों के मेरे अनुभव से मैं आपको बता सकता हूँ कि सिर्फ प्यार से पेट नहीं भरता और न ही जीवन खुशहाल होता है। रिश्ते की दीर्घायु के लिए प्यार और धन दोनों की जरूरत है।

हर समय प्यार का इजहार करने से पेट नहीं भरेगा। एक शादीशुदा जोड़े के रूप में आपको फूलों के गुलदस्ते और कुछ महंगे इत्रों के अलावा भी बहुत ही चीजें चाहिए। एक जोड़े के रूप में प्रश्न यह नहीं होना चाहिए कि पति और पत्नी में से ज्यादा कौन कमाता है, बल्कि यह होना चाहिए कि मिलकर अपनी धन-दौलत को कैसे बढ़ाया जाए। बजाय इस बात पर बहस करने के कि कौन करेगा, एक खुशनुमा वैवाहिक जीवन के लिए हमें यह सोचना चाहिए कि कैसे किया जाएगा।

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अगर अभी भी आपको मेरी बातों पर यकीन नहीं आता, तो मैं आपको कुछ उदाहरण देता हूँ। जब पहली बार आप अपनी होने वाली पत्नी से किसी रेस्तरां या पब में मिलते हैं, तो आप दोनों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि बिल का भुगतान कैसे किया जाएगा? क्या लड़का भुगतान करेगा या लड़की या फिर वे दोनों इसे आधा-आधा बाँट लेंगे? इस छोटे से उदाहरण से यह साबित हो जाता है कि पैसा कितनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है

अपनी बात को और स्पष्टता से समझाने के लिए मैं इसी मीटिंग के उदाहरण को जारी रखता हूँ। दिन के अंत में, जब आप एक दूसरे से विदा लेंगे और जाने के लिए टैक्सी करेंगे, तो फिर सवाल यही होगा कि टैक्सी का किराया कौन देगा? मुझे नहीं लगता कि मुझे इस सवाल का जवाब देना पड़ेगा।

सच है कि पैसा खुशी नहीं खरीद सकता। फिर भी, एक महंगी कार में बैठ कर रोना, एक साइकिल पर बैठ के रोने से ज्यादा अच्छा है। कम से कम आपके पास महंगी कार तो है।

हम एक ऐसे समाज में रह रहें हैं, चाहे औरतों को सभी हक बराबर के चाहिए, सिवाए भुगतान के। हमारी खोखली सभ्यता के हिसाब, हमेशा मर्द ही भुगतान करेगा। किसी लड़की को भुगतान के लिए कहना शर्मिंदगी मानी जाती है। ज्यादातर लड़कियां भी यही चाहती हैं कि उनका साथी ही भुगतान करें। अगर कोई मर्द अपनी महिला साथी को भुगतान के लिए कह भी देता है, तो उसे नाकारा समझा जाता है और यह ताना मारा जाता है कि यह औरत की कमाई खा रहा है।

हमारा समाज ही ऐसा है, जिसने हमें यह मानने पर मजबूर कर दिया है कि पैसों का लेन-देन करना सिर्फ आदमी की ही जिम्मेदारी है। जन्म से ही, मर्दों के दिमाग में इस विचार को डाल दिया है कि चाहे कुछ भी हो, लेकिन परिवार के पालन-पोषण के लिए जरूरी धनराशि जोड़ने की जिम्मेदारी आदमी की होती है, औरत की नहीं।

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एक शोध के मुताबिक, 93% महिलाएं केवल इसलिए रिश्ते को मना कर देती हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि उनका भावी-पति भविष्य में उतना पैसा नहीं कमा पाएगा, जितना वे उम्मीद करती हैं और न ही उनकी आर्थिक जरूरतों को पूरा कर पाएगा।

मैंने कई जोड़ों से सुना है कि शादी के पहले कुछ सालों तक उनका रिश्ता अच्छा रहा, लेकिन, कुछ समय बाद चीजें बदतर हो गई। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि प्रारंभिक वर्षों में हम अपने साथी के वेतन और अन्य वित्तीय पहलुओं पर कभी गहराई से चिंता नहीं जताते। लेकिन, कुछ सालों बाद, हम अपने साथी की कमाई और व्यय की आदतें महसूस करना शुरू कर देते हैं। यह तब होता है जब प्यार की परिभाषा फूलों के गुलदस्तों से किराने के बिलों में बदल जाती है। ऐसे समय में, पति-पत्नी एक दूसरे की कमाई और खर्चे पर नज़र रखने लगते है कि कौन क्या कमा रहा है, और कौन कितना खर्च कर रहा है?

अगर आपका भी कोई प्रश्न हो, तो हमारे विशेषज्ञ से पूछें।

इन सब चीजों पर जासूसी या बहस करने से अच्छा है कि आप आकस्मिकताओं के लिए कुछ पैसे अलग से बचा कर रखें। भले ही यह आकस्मिकताएँ बहुत छोटी-छोटी होती है, लेकिन मैंने इनके पीछे भी रिश्ते टूटते देखे हैं।

इस संदर्भ में, दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति वॉरेन बुफे ने एक बहुत अच्छी बात कही है कि खर्च करके बचत न करो, बचत करके खर्च करो।

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