सकारात्मक रहें – नकारात्मक प्रतिक्रिया से निपटना सीखें

किसी एक विफलता के कारण हार मान लेना ठीक वैसा ही है जैसे गाड़ी के एक टायर के पंक्चर होने पर बाकि के तीन भी पंक्चर कर देना।

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Sukhdeep Singh

Sukhdeep Singh

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Passionate about playing with words. Sukhdeep is a Post Graduate in Finance. Besides penning down ideas, he is an expert online marketing consultant and a speaker.

मुख्य आकर्षण

  1. नकारात्मक प्रतिक्रिया कोई समस्या नहीं है।
  2. ठन्डे दिमाग को बनाए रखें।
  3. याद रखें कि कोई भी 100 % सही नहीं होता, फिर वह चाहे कोई आलोचक ही क्यों न हो।
  4. अपने बारे में किसी के नकारात्मक विचारों को एक टॉनिक के रूप में लें।

“क्या तुम पागल हो? यह तुम्हारी सबसे बढ़ी गलती है। तुम ऐसा कर भी कैसे सकते हो। तुमने पूरी प्रेजेंटेशन का सत्यानास कर दिया। क्या तुम जानते हो कि तुम जो भी बोल रहे थे, उसका तुम्हारी प्रेजेंटेशन से कोई लेना-देना ही नहीं था। तुम जो कह रहे थे और जो प्रोजेक्टर स्क्रीन पर दिख रहा था, दोनों अलग थे। तुम्हारी आवाज़ काँप रही थी। क्या तुम इसे प्रेजेंटेशन कहते हो? तुमने पूरी डील ख़राब कर दी।”

ऐसी ही कुछ बातें किसी को भी कही जाए, तो उसके आत्मविश्वास की धज्जियां उड़ना तय है। आपको अपनी ही काबिलियत पर शक होने लगेगा। हम सभी अपने बारे में या अपने काम के बारे में अच्छा ही सुनना चाहते हैं। लेकिन, ऐसा अक्सर नहीं होता। चीजें हमेशा वैसे नहीं होती, जैसे हम चाहते हैं। सच तो यह है कि नकारात्मक प्रतिक्रिया, चाहे वह हमारे बॉस की तरफ से हो, परिवार की तरफ से हो या किसी सहकर्मी की तरफ से, इसे पचा पाना आसान नहीं होता। लेकिन, क्या आप जानते हैं कि अगर नकारात्मक प्रतिक्रिया को सकारात्मक तरीके से लिया जाए, तो यह आपके व्यक्तित्व को पूरी तरह से निखार कर आपको एक अलग ही इंसान बना सकती है? इस लेख में, हम आपको बताएंगे कि कैसे नकारात्मक प्रतिक्रिया को सकारात्मक तरीके से कैसे लिया जाना चाहिए।

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1नकारात्मक प्रतिक्रिया एक अच्छी चीज है

किसी ने सच ही कहा है कि अपने निंदकों से प्यार करो। आपके निंदक आपके व्यक्तित्व को निखारने में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। आपको इस बात पर खुश होना चाहिए कि इतने व्यस्त माहौल में भी कोई है जो आपके कामों में कमियां निकाल कर आपको बेहतर बनने और आगे बढ़ने का मौका दे रहा है।

हम यह नहीं कहते कि कमी निकाले जाने पर, आप गलत ही होंगे। असल में, यह 6 और 9 का खेल है। जो आपको 6 लग रहा है, वो उसे 9 दिख रहा होगा। गलत कोई भी नहीं है। तर्क यह है कि (आप और प्रतिक्रिया देने वाला व्यक्ति) आप दोनों अपनी-अपनी जगह ठीक हैं। ऐसे में विद्रोह जताने से अच्छा है कि 6 और 9 के फर्क को सही ढंग से खत्म किया जाए।

यहाँ आपको प्रतिक्रिया नहीं देनी है, बल्कि खुद की भावनाओं पर पूरा नियंत्रण रखना है। सचिन तेंदुलकर को कौन नहीं जानता? नकारात्मक प्रतिक्रिया को अपने फायदे के लिए कैसे इस्तेमाल किया जाता है, आप सचिन तेंदुलकर से सीख सकते हैं। मैच के दौरान अक्सर गेंदबाज एवं फील्डिंग में खड़े अन्य खिलाड़ी भी, उनकी एकाग्रता भंग करने के लिए, उनको अपशब्द बोल-बोल कर उनका मनोबल तोड़ने की हर संभव कोशिश करते थे। लेकिन, उन्होंने इन सब नकारात्मक प्रतिक्रियाओं को अपनी ताकत बनाया और खुद को विश्वस्तरीय बल्लेबाज के रूप में स्थापित किया। यही नहीं, बहुत से गेंदबाजों ने आगे चलकर सचिन की इसी खूबी (नकारात्मक प्रतिक्रिया को भी अपने लाभ के लिए इस्तेमाल करने की कला) की पूरी सराहना की।

इसलिए, हम आपसे कहना चाहेंगे कि जब भी आपको कोई नकारात्मक प्रतिक्रिया अर्थात नेगेटिव फीडबैक दे, तो उसे पूरी तरह से स्वीकार करें और समय आने पर उसका सही तरीके से जवाब दें।

2समस्या को समझें

जब कोई आपके काम से खुश नहीं है और उसकी संतुष्टि आपके लिए बेहद जरूरी है, तो आपको उसकी असंतुष्टि के कारण को समझना चाहिए। उसने आपको जो भी प्रतिक्रिया दी है, उसे समझें और देखें कि क्या वह प्रतिक्रिया सही है या गलत। यह जानने की कोशिश करें कि कहाँ कमी रह गई और समस्या को कैसे ठीक किया जा सकता है। यह भी हो सकता है कि आपके काम में निकाली गई कमी, उसकी निजी चिढ़ हो, अर्थात काम में कोई कमी ही न हो, पर उस व्यक्ति से आपके सम्बन्ध ही अच्छे न हो। ऐसे मामलें में भी आपको कारणों को समझना ही पड़ेगा। उसको सवाल करें कि कमी क्या है और किस तरह से आप चीज जो बेहतर बना सकते हैं।

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3गुस्सा मत दिखाएं

सबसे अहम बात है कि हमें किसी तरह की नकारात्मक प्रतिक्रिया को निजी नहीं लेना चाहिए। सच है कि नकारात्मक प्रतिक्रिया आपको चोटिल करती है और आपको गुस्सा आना भी स्वाभाविक है। लेकिन, ऐसा सिर्फ तह महसूस होता है, जब आप इसे अपने अहंकार पर चोट मान लेते हैं। आपको यह समझना चाहिए कि इस नकारात्मक प्रतिक्रिया की वजह से आपको अपनी गलती सुधारने का एक मौका मिलेगा और इससे आपका व्यक्तित्व भी निखेरगा। दोनों ही हालातों में, फायदा आपका ही है। लेकिन, गुस्सा दिखाए जाने पर नुकसान भी आपका ही होगा। यह भी हो सकता है कि नकारात्मक प्रतिक्रिया देने वाला आपकी इसी प्रतिक्रिया का इंतज़ार कर रहा हो। अतः, गुस्सा दिखा कर उसे जीतने मत दें। हमेशा याद रखें, जब आप हारते हैं या हथियार डाल देते हैं, तो आप अपने प्रतिद्वंद्वी ही बढ़ाते हैं।

4अपना समय लें

नकारात्मक प्रतिक्रिया के बाद फैसला लेने में जल्दबाजी न करें, खासतौर पर जब आपके पास कोई चारा न हो। अगर आपके काम में कमी निकली गई है, तो आपको उसे सुधारने का मौका मांगना चाहिए। इसके लिए, जो करना पड़े, अवश्य करें। हार मार लेने से चीजें ठीक नहीं बल्कि और बिगड़ जाती है। सामने वाले के मन में, आपके लिए इज्जत कम हो जाती है और वह आप पर भरोसा करना भी छोड़ देता है।

नकारात्मक प्रतिक्रिया दिए जाने पर अगर आप ठीक हैं, तो अपने पक्ष को पक्का करने के लिए सबूत जुटाएं। जितनी हो सके, सम्बंधित जानकारी एकत्रित करें और प्रतिक्रिया देने वाले व्यक्ति को समझाने के लिए तर्क दें। जब सही समय हो, तो तर्क देने से न घबराएं क्योंकि सही समय पर दिया गया सही तर्क, चीजों को बदल देता है। अगर किसी काम के सही होने में आपका कसूर नहीं है, तो भी तर्क और सबूतों से इस बात को साबित करें। अगर आप सही हैं, तो अपनी काबिलियत पर प्रश्न चिन्ह न लगने दें।

5आगे बढ़ें

नकारात्मक प्रतिक्रिया से विचलित न हो, बल्कि इसको अपनी ताकत बनाकर आगे बढ़ना सीखें। अगर कोई आपके बारे में नकारात्मक बातें फैलाता है, तो उसे करने दें। उससे डर कर वहां से भागना समस्या का हल नहीं है। बल्कि, उसी जगह पर रह कर, उस इंसान से लोहा लेना ज्यादा बढ़िया है। नकारात्मक प्रतिक्रिया देने वाले की हर बात को दिल पर न लेकर, आगे बढ़ना सीखना ज्यादा बढ़िया है। वैसे भी, यही तो हमारा उद्देश्य है कि खुद में सकारात्मक परिवर्तन करना। अपने प्रेरणा स्तर को बनाए रखने का प्रयास करें और अधिक सक्रियता से व्यवहार करने की कोशिश करें।

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अंत में, याद रखें कि नकारात्मक प्रतिक्रिया पर काम करने के बाद, फिर से प्रतिक्रिया लें क्योंकि यह एकमात्र तरीका है जिसके माध्यम से यह सुनिश्चित किया जा सकता है कि आप सही रास्ते पर हैं या नहीं।

हमेशा याद रखें – परफेक्शन अर्थात पूर्णता एक भ्रम हैं और गलतियाँ करके खुद को सुधारते रहना, परफेक्ट होने के भ्रम में जीने से कहीं बेहतर है।

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