नोमोफोबिया – मोबाइल की लत से कैसे छुटकारा पाएं

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How To Deal With Mobile Addiction
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Sukhdeep Singh

Sukhdeep Singh

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Passionate about playing with words. Sukhdeep is a Post Graduate in Finance. Besides penning down ideas, he is an expert online marketing consultant and a speaker.

एक अध्ययन के मुताबिक, यदि आप सोने से पहले अपने स्मार्ट फोन का उपयोग करते हैं, तो इससे न केवल आपकी नींद प्रभावित होती है, बल्कि अगले दिन आपका काम पर प्रदर्शन भी ख़राब होता है।

इस बात में कोई आशंका नहीं कि मोबाइल फोन की लत आगे चल कर बहुत खतरनाक हो सकती है। इस लेख में हम आज इस बात पर चर्चा करेंगे कि मोबाइल की लत से कैसे छुटकारा पाएं। लेकिन इस चर्चा से पहले मैं आपसे मोबाइल की लत से जुड़े कुछ चौंकाने वाले तथ्य सांझा करना चाहूंगा।

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मोबाइल की लत से जुड़े कुछ चौंकाने वाले तथ्य
  • क्या आप जानते हैं कि मोबाइल फोन की लत या मोबाइल फोन पर निर्भरता को एक बीमारी के रूप में विशेषज्ञों द्वारा नाम दिया चुका है? इस बीमारी का नाम है: नोमोफोबिया अर्थात मोबाइल फोन के पास न होने का डर। यह एक ऐसी स्थिति है, जिसमे एक इंसान तब परेशान या चिंतित हो जाता है, जब वह या तो फोन घर भूल जाता है या उसके फोन की बैटरी ख़त्म हो जाती है।
  • नोमोफोबिया के अतिरिक्त, मोबाइल लत से जुड़े एक और रोग के बारे में भी जानकारी सामने आई है। इसे घोस्ट फोन सिंड्रोम के रूप में जाना जाता है। इसमें, एक उपयोगकर्ता को हमेशा यही लगा रहता है कि उसे कॉल आ रही है या उसका फोन वाइब्रेट हो रहा है। लेकिन वास्तव में ऐसा कुछ नहीं हो रहा होता।
  • एक और शोध के मुताबिक, 18 और 29 की उम्र के बीच के 63% स्मार्टफोन उपयोगकर्ताओं को, अपने फोन के साथ ही सोने की आदत है अर्थात वह फोन को अपने बिस्तर में या आसपास रखे बिना सो ही नहीं सकते।
  • एक अन्य अध्ययन से पता चला है कि इन उपकरणों द्वारा उत्सर्जित नीले रिफ्लेक्स के साथ कृत्रिम प्रकाश जागरूकता के लिए जिम्मेदार कुछ न्यूरोसर्जन को सक्रिय करता है, जो स्नोनरेंस की स्थिति में देरी करता है।
  • अपने स्मार्टफोन या टैबलेट को शयनकक्ष में रखने से यह आपकी नींद की गुणवत्ता को प्रभावित करता है क्योंकि यह मेलेटनोन के उत्पादन को रोकता है, जो कि नींद-उत्प्रेरण करने वाला हार्मोन है।
आइए, अब हम बात करते हैं - मोबाइल की लत से कैसे छुटकारा पाएं

1देर रात तक चैटिंग करना बंद करें

जब आप बिस्तर पर लेटने के बाद फेसबुक या व्हाट्सएप को खोलते हैं, तो यहीं से आपकी समस्या का आगाज़ हो जाता है। सबसे पहले आप देखते हैं कि आपके दोस्तों ने क्या पोस्ट किया है। एक बार जब आप कुछ अच्छा या बुरा देखते हैं, तो आप उस पोस्ट पर अपने विचार व्यक्त करने से खुद को नहीं रोक पाते। वार्तालाप आपको पकड़ लेता है और देखते ही देखते यह आपके लिए जीत और हार का विषय बन जाता है। न चाहते हुए भी, आप इसमें अपने कई घंटे व्यर्थ कर देते हैं। उसके बाद, आप चाहे अपनी बातचीत को विराम दे भी दें, पर क्योंकि आपकी नींद खुद पहले ही ख़राब हो चुकी है, तो उसे दुबारा सेट करने में आपको काफी समय लगने वाला है अर्थात आप लम्बे समय तक जागते रहने वाले हैं। नतीजतन, अगले दिन आपके पास अगले दिन की गतिविधियों के लिए कम ऊर्जा होगी।

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2मोबाइल की लत को एक पुस्तक के साथ बदलें

यदि आपको बेडरूम में अपना फोन इस्तेमाल करने की लत है, तो आप फोन को किताब से बदल कर देखें। ध्यान रहे कि लैंप से उत्सर्जित वाली रौशनी मोबाइल से उत्सर्जित रौशनी की तरह खतरनाक नहीं होती। इसलिए, यह आपकी नींद से जुड़े हार्मोन को कोई नुकसान नहीं पहुंचाता। किताब का इस्तेमाल न केवल मोबाइल की लत से छुटकारा दिलाने में मदद करेगी, बल्कि अच्छी किताब पढ़ने से आपके ज्ञान में भी वृद्धि होगी।

3अपने साथी के साथ समय बिताएं

मोबाइल की लत कई रिश्तों की मौत के पीछे एक प्रमुख कारण है। ऐसे कई युगल हैं, जो बिस्तर पर अपने साथी से बात करने की बजाय अपने मोबाइल फोन पर समय बिताना ज़्यादा पसंद करते हैं। हालांकि, फेसबुक पर किसी अजनबी से बात करने की बजाय, अपने साथी को गले लगाना कई गुना बेहतर होता है। दुर्भाग्य से, इंटरनेट कनेक्शन वास्तविक जीवन के कनेक्शनों को मार रहा है और अगर आप वास्तव में अपने संबंधों के बारे में चिंतित हैं, तो फोन को बेडरूम से बाहर छोड़ दें।

4फोन पर आने वाली नोटिफिकेशन को बंद करें

अपने आप से पूछो, जब आप बिना किसी वजह के अपना फोन निकालतें हैं, तो सबसे पहले क्या करते हैं? ज़ाहिर है, सबसे पहले आप मोबाइल की स्क्रीन पर आने वाली नोटिफिकेशन्स को देखते हैं और उनसे निपटने में व्यस्त हो जाते हैं। इसलिए, यदि आप इन नोटिफिकेशनों को बंद कर सकते हैं, तो बंद कर दें। मुझे विश्वास है कि ऐसा करने से मात्र आप एक हद तक अपनी मोबाइल लत से निपटने में सक्षम हो जाएंगे। जब कोई नोटिफिकेशन नहीं होगी, तो आपकी तरफ से भी कोई हलचल नहीं होगी।

5सोशल मीडिया छोड़ें

मुझे पता है कि यह असंभव है! आजकल की दुनिया में अगर आप फेसबुक या व्हाट्सएप पर नहीं हैं, तो लोग आपको पागल कहते हैं। फिर भी, अगर पूरी तरह छोड़ना असंभव नहीं है, तो कम-से-कम एक सप्ताह तक इनसे दूर रहने का प्रयास करें। मुझे नहीं लगता है कि ऐसा करने से आपकी नौकरी या सामाजिक स्थिति पर कोई प्रभाव पड़ेगा।

6सोशल मीडिया ग्रुपों से बचें

फेसबुक या व्हाट्सएप पर हजारों ग्रुप हैं, और मैंने इन ग्रुपों पर लोगों को बेकार के विषयों पर बहस करते हुए देखा है। इसमें भी कोई दो राय नहीं है कि यह छोटी-छोटी व्यर्थ की बहसें आपकी भीतरी शांति भंग करने के लिए सक्षम हैं। इसके अलावा, जितने समूह, उतने अलग-अलग सोच वाले लोग और उतने ही बेतुके सन्देश। यदि आप भावनात्मक तौर पर बुद्धिमान व्यक्ति नहीं हैं, तो किस भी छोटी सी पोस्ट पर (ऑनलाइन) विवाद से बचना आपके लिए एक आसान काम नहीं होगा। अंत में, यह आपके संपूर्ण सोशल नेटवर्किंग अनुभव को खराब कर देगा।

क्या इस विषय में आपका कोई प्रश्न हैं ? हमारे विशेषज्ञ से ज़रूर पूंछे।

7अपने वाई-फाई या मोबाइल डेटा को बंद करें

मेरे ख्याल से, मोबाइल की लत से निपटने के लिए यह एक बहुत ही आसान और बढ़िया तरीका है। जब आप सोने के लिए तैयार हैं, तो अपने वाई-फाई या मोबाइल डेटा को बंद कर दें। मैंने कई बार लोगों के बेडरूम में वाई-फाई राउटर / मॉडेम लगे हुए देखे हैं। परन्तु, अगर आप वास्तव में अपने फोन की लत से छुटकारा पाना चाहते हैं, तो मैं आपको सुझाव दूंगा कि वाई-फाई राउटर / मॉडेम को अपने बेडरूम के अलावा किसी अन्य जगह पर स्थापित करें।

सभी बातों की एक बात – लत छोड़ना असंभव काम नहीं है। वास्तव में, यह कुछ भी नहीं है, लेकिन आत्म-नियंत्रण है और, ऐसा करने के लिए, आपको बस एक चीज़ की जरूरत होती है और वह है इच्छा शक्ति। उम्मीद है, आप मुझसे सहमत हैं।

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