कामयाब होना है तो ध्यान रखें यह बातें

खुदी को कर बुलंद इतना कि हर तकदीर से पहले खुदा बन्दे से खुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है।

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Kumar Sunil

Kumar Sunil

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Creative. One word says it all for Sunil. A engineer, an enthusiastic and conscientious Information Technology consultant by profession, Sunil shares a special interest with entrepreneurship and lifestyle.

मुख्य आकर्षण

  1. भेड़ मत बनो। भेड़चाल करने वाला इंसान कभी अलग पहचान नहीं बनाता।
  2. सपनों के लिए जो भी करना पड़े, अवश्य करें।
  3. प्रेरणा भी तभी काम आती है, जब आप खुद कुछ करते हैं।
  4. बूंद बूंद से सागर बनता है, इसलिए थोड़ा-थोड़ा रोज बदलें।

बहुत से लोग कहते हैं कि वह प्रेरणा की कमी महसूस करते हैं। लेकिन, सच तो यह कि उनमें कमी प्रेरणा की नहीं, बल्कि दृढ़ संकल्प की होती है। प्रेरणा तो आनी जानी चीज है, जो आज है और कल नहीं है।

क्या अपने कभी महसूस किया है कि पिछले कुछ दशकों में मोटिवेशन अर्थात प्रेरणा एक बहुत ही प्रसिद्ध हैश टैग बन गया है। इंटरनेट हो या वास्तविक समाज, प्रेरक वक्ता, प्रेरक पुस्तकें, उद्धरण, कहानियां, लेख, आपको हर जगह मिल जाएंगे। कभी-कभी ऐसा लगता है कि मानों हम भेड़ बनते जा रहें और अपनी पहचान खोते जा रहें हैं। हमें जिस तरफ यह प्रेरणात्मक चीजें ले जाती हैं, हम कुछ पलों के लिए उस तरफ ही चलने लगते हैं। देखा जाए, तो हमारी हालात उस छोटे बच्चे की तरह हो गई है, जिसे हर कदम पर किसी बड़े का सहारा चाहिए और उनकी ऊँगली पकड़े बिना वह एक कदम भी नहीं चल सकता। हम इसे अपने अंदर का डर मानते हैं, लेकिन विशेषज्ञ इसे आत्मविश्वास की कमी कहते हैं। दोस्तो, मुझे यह कहने में कोई आपत्ति नहीं है कि हमें प्रेरणा की नहीं, बल्कि खुद की अनुमति की जरूरत है

ईमानदारी से बताइये, क्या आप लोग भी कुछ ऐसा ही महसूस करते हैं? क्या आप भी कुछ मोटिवेशनल कहानियां पढ़ने के बाद, प्रेरणा से भरा हुआ महसूस करते हैं? क्या किसी मोटिवेशनल स्पीकर की कुछ पंक्तियां, कुछ समय के लिए, आपको प्रेरणा से भर देती हैं और कुछ समय के बाद आप प्रेरणात्मक रूप से फिर मर जाते हैं? तो आप सच से अनजान हैं।

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सच यह यह है कि जब बात सफलता हासिल करने की आती है, तो प्रेरणा, इच्छा, लक्ष्य, उत्पादकता जैसे सभी शब्द बेमतलब हो जाते हैं, अगर आप खुद को नहीं बदलते। अगर आप इन शब्दों में छिपे लाभ को पाना चाहते हैं, तो सबसे पहले आपको वह बनना पड़ता है, जो अब तक आप नहीं थे। सरल शब्दों में, जब तक आप खुद को नहीं बदलते, तब तक कुछ बदल भी नहीं सकते। इसलिए, अगर आप अपने आसपास के नजारों को बदलना चाहते हैं, तो शुरुआत खुद से करें।

ध्यान रखें, आपके पास कोई भी ऐसा व्यक्ति न हो, जो आपके महत्वाकांक्षी दृष्टिकोण को हतोत्साहित कर सकता हो। अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए प्रशंसकों की आवश्यकता नहीं है। आपको खुद अपनी प्रेरणा बनना है।

सच कड़वा होता है और सच यह है कि आप कोई रोबोट नहीं हैं। अगर आप में जीतने की इच्छा ही नहीं है, तो आप कभी जीत ही नहीं सकते। आप जितने भी प्रेरणात्मक लेक्चर सुन लें, अगर आप खुद को बदलने के लिए मजबूर नहीं करेंगे, तो इस जीवन में आप कामयाब हो ही नहीं सकते। यह जीवन है और इसमें हमें कई बार बहुत बुरे हालातों से भी गुजरना पड़ सकता है। ऐसे में, अगर आप इन कठिनाओं से लड़ेंगे नहीं, और सिर्फ मोटिवेशनल लेक्चर ही सुनते रहेंगे, तो आप का कुछ भी भला होने वाला नहीं है।

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आप सब कुछ नियंत्रित नहीं कर सकते। आप 5 बजे उठ सकते हैं, लेकिन उठने के बाद आपका मूड कैसा होगा, आप इस पर नियंत्रण नहीं कर सकते। अगर आप उदास और हताश उठते हैं, तो 5 बजे उठने का भी क्या फायदा है? हर दिन कड़ी मेहनत करने में कोई बुराई नहीं है, लेकिन आपको शरीर के हिसाब से खुद को छोटे-छोटे अंतराल भी देने चाहिए। कभी-कभी काम से ब्रेक लेना भी जरूरी होता है। यह छोटे-छोटे ब्रेक आपको एक इंसान बनाए रखते हैं और पूरी तरह से मशीन नहीं बनने देते।

आप चाह कर भी परिणाम का फैसला नहीं कर सकते हैं। आप लाख कोशिश करके भी परिणाम और मुद्दों को नियंत्रित नहीं कर सकते। आपको यह सीखना होगा कि कुछ चीजों में अप्रत्याशितता और अनिश्चितता बनी रहती है और यह दोनों चीजें आपके नियंत्रण से बाहर हैं।

आप जैसा जीवन चाहते हैं उसके लिए आपको प्रेरणा की नहीं बल्कि बलिदान की जरूरत होती है। कुछ पाने के आपको कुछ खोना भी पड़ता है और सबसे पहले आपको अपनी शर्मिंदगी का त्याग करना पड़ता है। अगर आप आज से भी कामयाबी की ओर बढ़ना चाहते हैं, तो अपनी पुरानी मान्यताओं को किसी खिड़की से बाहर फेंक दें।

खुद से कभी यह मत कहें कि यह नहीं हो सकता या आप ऐसा नहीं कर सकते। कामयाब होने के लिए खुद की शर्मिंदगी को अपना रास्ता न रोकने दें। कुछ भी हो जाए, अपने संदेहों को खुद पर हावी न होने दें। सफल लोगों के जीवन में झांक कर देखें। उनकी कहानियों में एक बात आम है – “जोखिम जितना अधिक होगा, लाभ भी उतना ही ज्यादा होगा।
केवल सफलता की कहानियां ही न पढ़ें क्योंकि उनसे आपको सिर्फ एक संदेश मिलेगा। इसके विपरीत विफलता की कहानियां पढ़ें क्योंकि उनसे आपको असफल होने के कारणों के बारे में पता चलेगा।

जो लोग आपके पसंदीद जीवन को नहीं जी रहें हैं, उनकी बातों को सुनना बंद करें। कोई भी प्रवक्ता, चाहे कितना भी अच्छा स्पीकर क्यों न ही, अपनी बातों से आप में प्रेरणा नहीं डाल सकता। प्रेरणा आपके अंदर से ही आती है। मैं इस बात की गारंटी दे सकता हूं कि चाहे आप हजारों मोटिवेशनल किताबें पढ़ लें, जब तक आप खुद को नहीं बदलते, आप कुछ भी बदल नहीं सकते।

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तथ्य यह है कि अगर आपको प्रेरणा ही चाहिए, तो सिर्फ यह सोचिए कि आप जो बनना चाहते हैं, वो आप क्यों नहीं हैं। आपकी अब तक की नाकामयाबी ही आपके लिए सबसे बड़ा प्रेरणा का स्रोत होनी चाहिए। इसके साथ ही, चिंता करना बंद करो क्योंकि नाकामायबी की चिंता करना, वास्तव में नाकामायबी के लिए प्रार्थना करना जैसा ही है। यह एक ऐसा काला जादू है, जिसे आप पूरी तरह से समझ नहीं पाते हैं और यह अप्रत्याशित तरीके से काम करता है।

कुछ चीजों को हमें उन्ही पर छोड़ देना चाहिए। वो कहते हैं न कि जो भी होता है, वो किसी वजह से ही होता है। मेरी बातें शायद आज आपको समझ में न आए और बेकार लगें। लेकिन, अगर आप यह लेख पढ़ चुकें हैं और इसने कुछ हद तक आपके दिमाग पर असर डाला है, तो कुछ दिनों के बाद आप खुद ही समझ जाएगा।

जब आप ऐसे दरवाजे के सामने खड़े होते हैं, जिसके अंदर अवसर ही अवसर है, तो दरवाजे पर दस्तक देकर समय खराब न करें। उस दरवाजे को लात मार के खोलें, मुस्कुराएं और अपना परिचय दें।

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