भूतिया मकान की सच्ची कहानी – नवंबर 25 की वो सर्द रात

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Ghost Confession - That Cold Night of November 25
Ghost Confession - That Cold Night of November 25
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रात के एक बजे, घर के बाहर कुत्तों के लड़ने और भोंकने की आवाज़ ने मुझे अचानक जगा दिया। मैं शायद किसी स्वप्न में था। कच्ची नींद में जब मेरी आँख खुली, मुझे अचानक से बहुत प्यास महसूस हुई। पानी पीने के लिए मैं बैडरूम से निकल कर फ्रिज की ओर बढ़ा। पानी की बोतल हाथ में लेकर, मैं लॉबी में आकर बैठ गया। इन सब के बीच कुत्तों के भोंकने की आवाज़, रोने की आवाज़ में बदल चुकी थी। जैसे ही मैंने पर्दा हटाया और बाहर देखा, बाहर एक दम सन्नाटा छा गया। मुझे हैरानी तो हुई, लेकिन रात के एक बजे मैंने वापिस जा कर सोने को ज्यादा जरूरी समझा। मैंने बाथरूम इस्तेमाल किया और वापिस अपने पलंग पर आकर लेट गया।

अचानक मुझे महसूस हुआ कि मैं बाथरूम की लाइट बंद करना भूल गया हूँ। मैं दुबारा से उठा और लाइट बंद करके, लेट गया।

अभी मेरी आँख लगी ही थी कि मुझे दरवाजे पर दस्तक सुनी। पहले मुझे लगा कि यह मेरे मन का वहम है। लेकिन, कुछ देर बार यह दस्तक ज्यादा जोर से हुई।

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मैंने पलंग के नीचे से एक लोहे की रॉड निकाली और दरवाजे की ओर बढ़ा। दरवाजा खोलने से पहले, मैंने पर्दा हटाकर देखना ठीक समझा। जैसे ही, मैंने बहुत सावधानी से दुबारा पर्दा हटाया, तो मैं हैरान रह गया। दरवाजे पर कोई भी नहीं था। आधी रात को मैंने बेवजह दरवाजा खोलना सही नहीं समझा और वापिस आकर पलंग पर लेट गया।

Ghost Confession-That summer night of July 29th
Ghost Confession-That summer night of July 29th

कुछ देर जागने के बाद, मैंने दुबारा सोने की कोशिश की। काफी कोशिशों के बाद, जैसे ही नींद ने मुझे घेरा, रसोईघर के नल के चलने की आवाज़ आने लगी। अब मेरा दिल तेजी से धड़कने लगा था। सच कहूं, तो मैं डर गया था। मुझे ऐसा लग रहा था, मानो मैं किसी भूतिया मकान में हूँ। पर इस बार मैं उठा नहीं और पलंग पर पड़ा रहा। थोड़ी देर के बाद वह आवाज़ अपने आप ही बंद हो गई। मुझे भी इसके बाद नींद आ गई।

अगली सुबह, नवंबर 26, 2017, रविवार का दिन था। मैं तकरीबन 11 बजे उठा। जैसे ही मेरी आँख खुली, पिछली रात के हादसे की याद ताज़ा हो गई। जागने के एक घंटे तक भी मैं उसी हादसे के ख्याल में डूबा हुआ था। बहरहाल, मैं उठा और बाथरूम की ओर बढ़ा। मुझे बाथरूम के फर्श पर कुछ अजीब से धब्बे मिले। मैंने सोचा कि शायद यह बाथरूम को साफ करने वाले तरल के निशान हैं। इसलिए, मैंने इसे अनदेखा कर दिया।

सारा दिन मैं घर से बाहर था और रात को जैसे ही लौटा, एक बार फिर मुझे रात के हादसे को याद करके कंपकपी महसूस होने लगी थी। खैर, मेरे पास और कोई चारा नहीं था। जैसे ही सड़क पर लगी बत्तियाँ जवान होने लगी, मेरी बैचेनी बढ़ने लगी थी। रात के करीब 12.30 बजे तक मैं सो नहीं पाया। मुझे ऐसा लगने लगा था कि मुझे वह रात भी जाग कर ही बितानी पड़ेगी। फिर, रात के 1.30 बजे, रसोई में बर्तनों की उथल-पुथल होने लगी। बर्तनों के गिरने और हिलने की आवाज़ आने लगी थी।

“कौन है? कौन है?” मैंने दो बार सवाल किया। लेकिन कोई जवाब नहीं था। हालांकि, मेरे बोलने पर बर्तनों के हिलने की आवाज़ बंद हो गई थी।

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मैंने कमरे से बाहर आकर देखा, तो मुझे किसी (भूत) की मौजूदगी का एहसास हुआ। अँधेरा होने की वजह से मैं कुछ देख नहीं पा रहा था। हिम्मत करके मैंने लॉबी की लाइट जलाई और जैसे ही मैं रसोई की ओर बढ़ा, मुझे ऐसा महसूस हुआ कि कोई मुझे छू कर निकला है। मेरी चीख निकलने को थी, लेकिन किसी तरह मैंने खुद को संभाला। पूरी रात मैं सो नहीं पाया।

भूतिया मकान वाला यह सिलसिला कुछ दिनों तक चलता रहा। रोज़ ठीक रात के 1 से 2 बजे के बीच ऐसी हलचलें होती और फिर अपने आप बंद हो जाती। पहले मुझे लगता था कि शायद यह मेरे मन का वहम है। लेकिन 12 जनवरी के बाद, मेरी सभी शंकाएं दूर हो गई।

उस रात, ठीक उसी समय, मुझे किसी ने मेरे नाम से आवाज़ दी। मैंने जानबूझकर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। लेकिन, फिर मैंने महसूस किया कि किसी ने मेरे पैरों को हिलाया है। इस बार मैंने न चाहते हुए भी आँखें खोल दी। जैसे ही आँखें खुली, तो सामने एक बूढ़ी औरत, जिसका चेहरा झुर्रियों से भरा हुआ था, मेरी तरफ देख कर मुस्करा रही थी।

Ghost Confession-That summer night of July 29th
Ghost Confession-That summer night of July 29th

फिर उसने मुझे कमरे से बाहर बुलाया और खुद लॉबी में पड़े सोफे पर जा बैठी। वहीं बैठी हुई वह मुझे देख रही थी और मेरे कमरे से बाहर आने का इंतज़ार कर रही थी। मेरे पैर जम से गए थे। मुझे न आता देखकर, उसके चेहरे पर गुस्से के संकेत आने लगे थे। ऊँगली के इशारे से उसने मुझे बुलाया। इस बार मैं डर के मारे खुद को रोक नहीं पाया और उसके पास जा बैठा।

उसने अपनी कहानी बतानी शुरू की। उसने मुझे कहा कि कैसे उसके दो बेटों ने, जो विदेश में रहते हैं, इस घर में उसे नज़रबंद कर रखा था। यहाँ तक कि घर की खिड़कियों को भी पलाई लगाकर बंद किया हुआ था। वह नहीं चाहते थे कि उनकी माँ के बारे किसी को भी पता चले। फिर एक रोज़ उनके घर में कोई चोर दाखिल हुआ। उसने घर पर कब्ज़ा करने की मंशा से उस बूढ़ी औरत को मार दिया। जब कुछ दिनों के बाद घर से बदबू आने लगी, तो पड़ोसियों ने घर के दरवाजे को तोड़ कर उसकी लाश को बाहर निकाला।

उसकी कहानी सुनते हुए मैं यह समझ ही नहीं पा रहा था कि मुझे डरना चाहिए या भावुक होना चाहिए। लेकिन, फिर भी मैंने हिम्मत करके पूछा, “आखिर आप मुझसे क्या चाहते हो?”

इस सवाल पर वो हसने लगी और मेरी तरफ ऐसे देखने लगी जैसे मैंने कोई गलत सवाल पूछ लिया हो।

अगली सुबह, मैंने खुद को सोफे पर ही लेटे हुए पाया। मुझे अपना सिर बहुत भारी लग रहा था और काफी देर तक मैं समझ ही नहीं पाया कि मैं पलंग से सोफे तक पहुंचा कैसे।

अगली सुबह मैंने अपने पड़ोस में रहने वाले कुछ लोगों से इस घर के बारे में बात की। जैसे मुझे उम्मीद थी, उन लोगों से इस भूतिया मकान के बारे में कोई जवाब नहीं मिला।

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फिर किसी ने मुझे जंगल में रहने वाले एक फ़क़ीर के बारे में बताया और मुझे भी लगा कि शायद वह इंसान मेरे सवालों का जवाब दे पाएगा। मैंने उससे इस विषय में बात की।

Ghost Confession-That summer night of July 29th
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उसने मुझे बताया कि मुझे वह घर खाली कर देना चाहिए। उसने मुझे बताया कि उस घर में पहले जो भी किराये पर रहने आया, बीमार ही हुआ है। कुछ महीने पहले एक जोड़ा रहने आया था। उन्होंने ने भी मकान मालिक से इन घटनाओं का जिक्र किया था। परन्तु, मकान मालिक ने अनसुना कर दिया। कुछ रोज़ के बाद, वह जोड़ा उसी घर के बाथरूम में मरा हुआ पाया गया।

उस फ़क़ीर ने बताया कि यह घर काफी समय तक बंद भी रहा। लेकिन, अब कई सालों के बाद मैंने इस घर को रहने के लिए चुना। उसने मुझे सलाह दी कि मुझे वह घर छोड़ देना चाहिए।

कुछ समय तक मैंने उस फ़क़ीर की बात को गंभीरता से नहीं लिया, जिसकी कीमत मुझे अनिद्रा रोग, बेचैनी, उच्च रक्तचाप जैसी बीमारियों के रूप में चुकानी पड़ी। इसके अलावा, वही बर्तनों का शोर, बाथरूम में खून के धब्बे, रात को सोते समय किसी से साथ लेटे होने का या घूरने का एहसास, कभी-कभी कन्धों पर वजन महसूस होना, कभी किसी के हसने के आवाज़ इत्यादि जैसी कई समस्याओं से मुझे हर दूसरी रात को गुजरना पड़ता था।

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तकरीबन 6 महीने यह सब झेलने के बाद, मैंने वह घर छोड़ दिया। आज मैंने खुद का घर बना लिया है। मैं नहीं जानता कि भूत-प्रेत कल्पना है या सच। लेकिन, मैं इतना जानता हूँ कि मैंने एक साया बहुत करीब से महसूस किया है।

हालांकि आज मैं अपने नए घर में हूँ और खुश हूँ, फिर भी उस बूढ़ी औरत से हुई वह मुलाकात मुझे आज भी नहीं भूलती।

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