धोखा खाने के बाद भी हम उस व्यक्ति से रिश्ता क्यों बनाए रखते हैं

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Sukhdeep Singh

Sukhdeep Singh

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Passionate about playing with words. Sukhdeep is a Post Graduate in Finance. Besides penning down ideas, he is an expert online marketing consultant and a speaker.

अक्सर पाठक मुझसे यह सवाल करते हैं कि यह जानते हुए भी कोई इंसान उनके लिए ठीक नहीं है अर्थात उनका भला नहीं चाहता, फिर भी वह उसे छोड़ क्यों नहीं पाते? हम में से कुछ लोग क्यों ऐसे किसी इंसान से जुड़े रहते हैं, जो उन्हें कदम-कदम पर बेइज्जत करता है। क्यों वह उस रिश्ते को तोड़ कर एक नया रिश्ता बनाने से इतना डरने लगते हैं?

प्रश्न - धोखा खाने के बाद भी हम उस व्यक्ति से रिश्ता क्यों बनाए रखते हैं ?

अपने इंटरनेट और फिल्मों में दीवानेपन के कई किस्से देखे और पढ़े होंगे। चाहे लड़के हो या लड़कियाँ, इस पागलपन से कोई नहीं बचा। सैंकड़ो भोले -भाले प्यार पाने के इच्छुक, किसी न किसी धोखेबाज़ का शिकार बन ही जाते हैं और उसके जाल में इस तरह फंस जाते हैं कि उस धोखेबाज से प्यार की उम्मीद में जुल्म सहते रहते हैं और अपना निरादर करवाते रहते हैं। उसे छोड़कर किसी और से रिश्ता जोड़ने के बारे में सोचने से भी उन्हें डर लगने लगता है। सीधे शब्दों में कहूं, तो वह रिश्तों को लेकर नकारात्मक हो जाते हैं। इस लेख में आपको बताऊंगा कि ऐसा क्यों होता है और क्यों कुछ लोग चाहकर भी उस दर्द से बाहर नहीं निकल पाते।

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1रोजमर्रा की भागदौड़ और समय की कमी

इस बात में कोई शक नहीं कि हम लोग आजकल इतने व्यस्त हो गए हैं कि हमारे पास खुद के लिए समय नहीं है। खुद को जिन्दा रखने की दौड़ में हम जीना ही भूल चुके हैं। हमारे पास न परिवार के लिए समय बचा है और न ही अपनी खुशियों के लिए। हमने हर चीज से समझौता करना सीख लिया है, फिर चाहे वह रिश्ते ही क्यों न हो।

पैसा कमाने की जरूरत ने बाकि सभी जरूरतों का गला घोट दिया है। ऐसे हालातों में, किसी टूटे हुए रिश्ते को ठीक करने के बजाय हम सारी उम्र उसका बोझ ढोते रहते हैं और नए रिश्ते को बनाने से डरते हैं। अंदर ही अंदर हमें यह लगने लगता है कि सभी मर्द या औरतें एक जैसी ही होती है और किसी से नया रिश्ता बनाकर कोई फायदा नहीं होगा।

यह एक कारण है कि हम किसी मर चुके रिश्ते की लाश को कन्धों पर उठा कर घूमते रहते हैं और उम्मीद करते रहते हैं कि शायद यह ज़िंदा हो जाएगी। हम मन ही मन यह तय कर चुके होते हैं कि इस रिश्ते से निकलना और कोई नया रिश्ता बनाना, सिर्फ हमारी परेशानियों को बढ़ाएगा। इसी बात का डर, हमें हमारे वर्तमान रिश्ते में जकड़े रखता है और हम दर्द को अपनी किस्मत बना लेते हैं।

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2हम अपनी ही दुनिया से बाहर नहीं आना चाहते

मैंने अक्सर देखा है कि चाहे पुरुष हो या महिलाऐं, रिश्तों को लेकर दोनों एक अलग ही दुनिया में रहते हैं। वह इसी उम्मीद में दर्द और जिल्लत सहते रहते है कि एक दिन वह इंसान भी उनसे प्यार करने लगेगा, जिसने उन्हें आजतक किसी टिश्यू पेपर से ज्यादा नहीं समझा। न जाने क्यों, पर उनकों यह लगता रहता है कि यही वह इंसान है, जिसके साथ वह अपनी ज़िन्दगी बिताना चाहते हैं।

कभी-कभी उनकी यही एकतरफा सोच उनको कुछ और सोचने ही नहीं देती और वह किसी भी नए रिश्ते के लिए अंदर से तैयार ही नहीं हो पाते। वह उस बच्चे की तरह बर्ताव करने लगते हैं, जिसे कोई उपहार दिया जाता है और उसे कह दिया जाता है कि अगर उसने इस उपहार को खोला, तो उपहार गायब हो जाएगा। वह अपने वर्तमान रिश्ते से मिल रहे दर्द और तकलीफ को सहना ही अपना भाग्य मान लेता है और रिश्ते के ठीक होने की उम्मीद करता रहता है। अब ऐसी किसी भी स्थिति में, किसी नए रिश्ते की कोई गुंजाइश ही नहीं बचती।

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3पुराने किसी हादसे के कारण रिश्तों पर से भरोसा उठ जाना

कोई पुराना बुरा अनुभव भी नए रिश्तों को बनाने से रोकता रहता है। इसमें कोई शक नहीं है कि जब हमारा दिल किसी रिश्ते के कारण पूरी तरह से टूट चूका होता है, तो हम नए रिश्ते को बनाने से कतराने लगते हैं। हम अपने वर्तमान रिश्ते से बाहर निकलना ही नहीं चाहता और दर्द एवं तकलीफ सहन करते रहते हैं।

वर्तमान रिश्ते में मिल रहे दर्दों को भूल ही नहीं पाते और उसी रिश्ते को सुधारने की पुरजोर कोशिश करते रहते हैं। हमें कहीं न कहीं अपने वर्तमान रिश्ते के ठीक होने की उम्मीद बनी रहती है। साथ ही, हमारे मन में यह दुविधा भी बनी रहती है कि नया रिश्ता न जाने कैसे होगा। हमारे लिए अपने वर्तमान रिश्ते को छोड़ना, मरने के बराबर हो जाता है।

प्यारे दोस्तों, आपको समझना होगा कि जो अब तक नहीं बदला, वो कभी बदलने वाला भी नहीं है। जब आप किसी दूसरे को अपनी मज़बूरी बना लेते हैं, तो वह आपका हर संभव फायदा उठाने की कोशिश करने लगता है। इस बात में कोई दो राय नहीं कि आपकी मर्जी के बिना कोई आपके जीवन पर शासन नहीं कर सकता। आप कैसे जीयेंगे, यह आपको कोई दूसरा तभी बता सकता है, जब आप उसे ऐसा करने देंगे।

क्या इस विषय में आपका कोई प्रश्न हैं ? हमारे विशेषज्ञ से ज़रूर पूंछे।

जाहिर सी बात है कि अगर बंद कमरे में उमस से आप दम घुट रहा है, तो आपको ज़िंदा रहने और साँस लेने के लिए हवा की जरूरत होगी। इस ताज़ी हवा के लिए आपको घर के सभी खिड़की-दरवाज़े खोलने ही पड़ेंगे।

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