संचार कौशल अर्थात कम्युनिकेशन स्किल से जुड़ी कुछ आम गलतियां

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Sukhdeep Singh

Sukhdeep Singh

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Passionate about playing with words. Sukhdeep is a Post Graduate in Finance. Besides penning down ideas, he is an expert online marketing consultant and a speaker.

चाहे आपकी व्यक्तिगत जिंदगी की बात हो या व्यवसायी जिंदगी की, दोनों की सफलता में संचार कौशल बहुत ही अहम भूमिका निभाता है। एक बेअसर संचार कौशल, जहां आपकी प्रतिष्ठा को खराब कर सकता है, वहीं दूसरी तरफ आपको अन्य कई क्षेत्रों जैसे वित्तीय में भी नुकसान पहुंचा सकता है।

संचार कौशल अर्थात कम्युनिकेशन स्किल के महत्व और एक अच्छा संवाददाता कैसे बनें, इस बारे में अक्सर चर्चाए होती ही रहती हैं। हालांकि, हम सभी इन गलतियों से अवगत नहीं हैं। प्रभावी संचार कौशल विषय की समझ के अलावा भी कई चीजों पर निर्भर करता है। इस लेख में, मैं कम्युनिकेशन स्किल से जुड़ी कुछ आम गलतियों के बारे में आपको बताऊंगा, जो हम सभी करते हैं। इन गलतियों की वजह से ही हमारी अधिकतर बातें बेअसर हो जाती हैं। अगर आप भी चाहते हैं कि लोग आपको ध्यान से सुनें, तो संचार कौशल अर्थात कम्युनिकेशन स्किल से जुड़ी कुछ आम गलतियों से बचें और अपनी उपस्थिति को अंकित करें।

1यह सिर्फ हमारे बारे में हैं

यह एक आम गलती है, जो हम सभी करते हैं। बातचीत के समय हम में से बहुत से लोग बातचीत को सिर्फ खुद तक सीमित कर लेते हैं और उस बातचीत में सुनने वाले के लिए अपनी बात रखने का कोई मौका नहीं होता। आसान शब्दों में कहा जाए, तो पूरी बातचीत में, “हम” शब्द से ज्यादा “मैं” शब्द का इस्तेमाल ज्यादा होता है। ध्यान रखें कि बातचीत को हमेशा एक प्रतिस्पर्धा के रूप में नहीं देखना चाहिए, जिसे आपको हर हाल में जीतना ही होता है।

अपनी बातचीत को प्रभावी बनाने के लिए दूसरों को भी एक टीम के रूप में शामिल करें। अपने श्रोताओं को ऐसा महसूस न होने दें कि उस बातचीत के दौरान सिर्फ आप ही बोल सकते हैं। किसी भी समस्या को हल करने के लिए एक टीम के रूप में आप कैसे मिलकर काम कर सकते हैं, यह सीखना भी बहुत जरूरी है।

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2आँखों से संपर्क बनाना बहुत महत्वपूर्ण है

हम में से कई लोग आंखों के संपर्क के महत्व को गैर-जरूरी समझ कर नजरअंदाज कर देते हैं।

आप खुद से एक प्रश्न पूछें – किसी से बातचीत के दौरान आप कितनी बार उस व्यक्ति से नजर चुराने की कोशिश करते हैं अर्थात बोलने वाले की ओर न देखकर इधर-उधर देखते हैं?

यह जानते हुए भी कि हमारा इस तरह से इधर-उधर देखना एक सही सन्देश नहीं देता, फिर भी हम यह गलती करते ही रहते हैं।

जरा सोचकर देखिये, आपको कैसा लगेगा अगर आप किसी से बात कर रहें हैं और वह व्यक्ति आपकी ओर देख भी न रहा हो? उसका यह व्यवहार यकीनन आपको अच्छा नहीं लगेगा।

इसलिए, बातचीत को असरदार और मजेदार बनाने के लिए आपको बातचीत के समय आँखों के संपर्क की महत्ता को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

3अनियमित और गलत समय पर लिए गए विराम

मैंने लोगों को चर्चा के बीच में दूसरों को काटते देखा है। यह एक ऐसी बड़ी गलती है, जो यह साबित करती है कि आप संचार कौशल के बारे में कुछ नहीं जानते।

जब आप बातचीत के दौरान किसी की बात को काटकर अपनी बात रखते हैं, तो आप वास्तव में उसे बताते हैं कि जो कुछ आप कहना चाह रहे हैं वह उसकी बात से कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण है। अप्रत्यक्ष रूप से आप उस व्यक्ति का अपमान कर रहे हैं।

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कई बार हम किसी की बात को बीच में इसलिए भी काट देते हैं क्योंकि हमें यह डर रहता है कि कहीं हम अपनी बात भूल न जाएं और कई बार हम किसी विषय को लेकर ज्यादा ही उत्साहित हो जाते हैं और अपनी बात रखने को एकदम से आतुर हो जाते हैं। कारण जो भी हो, लेकिन किसी की बात को बीच में काटना अच्छा नहीं होता और आपका ऐसा करना यह साबित करता है कि आप संचार कौशल के बारे में कुछ नहीं जानते। इसके विपरीत, हमें इंतजार करना सीखना चाहिए।

4शरीर की नकारात्मक भाषा

निर्विवाद रूप से, हमारे हावभाव वह सब बोल देते हैं, जो हम जुबान से नहीं कह पाते अर्थात आपकी शारीरिक गतिविधियों के माध्यम से आपका संदेश डीकोड करना बहुत आसान होता है। इसलिए, खुद को बेहतरीन संचार कौशल वाले व्यक्ति के रूप में पेश करने के लिए आपको अपनी शारीरिक गतिविधियों को नियंत्रण में रखना चाहिए।

5हम बिना सोच-विचार के निष्कर्ष पर पहुंच जाते हैं

यह एक बहुत ही आम गलती है। हम पूरी बात सुने बिना निष्कर्ष तक पहुंचने की जल्दी करते हैं।

किसी विषय को पूरी तरह जाने बिना उसके बारे में धारणाएं कायम कर लेना अच्छा नहीं होता क्योंकि जैसे उचित समझ के बिना किसी विषय में कामयाबी की कल्पना करना बेवकूफी होती है, वैसे ही पूरी बात सुने बिना फैसला कर लेना भी मूर्खता होती है ।

आप ही बताइए, आपको कैसा लगेगा, जब कोई आपके बारे में आपका पक्ष सुने बिना राय बना ले।

6भावनात्मक अपरिपक्वता

भावनात्मक रूप से परिपक्व होना भी बहुत महत्वपूर्ण होता है। हम में से अधिकांश लोग नहीं जानते कि विभिन्न परिस्थितियों में खुद की भावनाओं को कैसे नियंत्रण में रखा जाता है।

ऐसा अक्सर देखा गया है कि जो लोग भावनात्मक रूप से सुलझे हुए नहीं होते, वो किसी चीज पर चर्चा करते समय अपनी भावनाओं पर नियंत्रण खो बैठते हैं।

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उदाहरण के लिए अगर आप गुस्से में हैं, तो आपको अपना गुस्सा ठंडा होने के लिए थोड़ा समय देना चाहिए। कोई बयान देने से पहले, खुद को शांत कर लेना जरूरी होता है।

7अभिमानी और आत्म केंद्रित व्यक्तित्व

खुद को एक बेहतर संचार कौशल वाला व्यक्ति साबित करने के लिए आपको अभिमानी और आत्मकेंद्रित व्यक्तित्व को त्याग कर, दूसरों को भी बोलने का मौका देना सीखना होगा।

अगर आप किसी से बातचीत के दौरान दूसरों को बोलने ही नहीं देंगे और न उनसे राय लेंगे, तो ऐसा करना आपको अभिमानी, आत्मकेंद्रित, और अहंकारी इंसान के रूप में पेश कर देगा। ऐसे इंसान की संगत में रहना कठिन होता है। अतः, दूसरों को भी उनकी राय सांझा करने दें।

8अपने तर्कों को मजबूत करें

जब हम किसी व्यक्ति की किसी बात से असहमत होते हैं, तो हम हमेशा उनकी असहमति की आलोचना करने के बजाय, उन लोगों के गुणों और आत्म-सम्मान पर ही हमला करने लगते हैं। अगर आप भी ऐसा करते हैं, तो आपको समझ जाना चाहिए कि आपका ऐसा करना आपको दूसरों की नजर में गिरा रहा है।

यदि आप वास्तव में किसी से बातचीत के दौरान खुद के पक्ष को सही साबित करना चाहते हैं, तो अपनी आवाज ऊँची करने के बजाय अपने तर्कों को ऊँचा करें अर्थात उस विषय में जितना हो सके ज्ञान इक्कठा करें। विषय के बारे में अपने ज्ञान को समृद्ध करके ही आप दूसरों को अपनी बात मनवा सकते हैं, चिल्ला कर नहीं।

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9हम आशा करते हैं कि दूसरे लोग हमारे बिना कुछ कहे ही समझ जाएं

हम पहले खुद ही नहीं बताते कि हमें क्या चाहिए और जब दूसरा व्यक्ति अपनी समझ के मुताबिक चीज़ों को कर लेता है, तो हम उसमें गलतियां निकालने लग जाते हैं।

अन्य लोग आपका दिमाग पढ़ लेंगे, आपको ऐसी उम्मीद नहीं करनी चाहिए। इसके बजाय, हमें दूसरों को लेकर अपनी उम्मीदों के बारे में पारदर्शी होना चाहिए। स्पष्टता संचार कौशल के लिए बहुत जरूरी है।

क्या इस विषय में आपका कोई प्रश्न हैं ? हमारे विशेषज्ञ से ज़रूर पूंछे।

इन सब के अलावा, जब बात प्रभावी संचार कौशल की होती है, तो सहानुभूति भी एक अनिवार्य हिस्सा है।

चर्चा को बहस बनाने के बजाय, यह स्वीकार कर लेने में कि आप गलत हैं, कोई हानि नहीं होती। गलती स्वीकार करना कमजोरी का नहीं है, बल्कि परिपक्वता का संकेत है।

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