5 ऐसी चीज़े जो आपको एक अच्छा मैनेजर बनने से रोकती हैं

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Kumar Sunil

Kumar Sunil

Dreamer & Enthusiast

Creative. One word says it all for Sunil. A engineer, an enthusiastic and conscientious Information Technology consultant by profession, Sunil shares a special interest with entrepreneurship and lifestyle.

अक्सर कहा जाता है कि जब भी कोई पुराना और मूल्यवान कर्मचारी आपकी कंपनी को छोड़ता है, तो उसके इस फैसले के पीछे प्रमुख कारण उसका मैनेजर ही होता है। आसान शब्दों में कहा जाए, तो कर्मचारी नौकरी को नहीं मैनेजर को छोड़ते हैं। बात कड़वी है, पर सच है कि बहुत से मैनेजर, उनके दिशा-निर्देश में काम करने वाले कर्मचारियों को गुलाम समझने की गलती कर बैठते हैं। मैनेजर की इस मूर्खता का हर्जाना, कंपनी को एक महत्वपूर्ण कर्मचारी खोने के रूप में भरना पड़ता है। परन्तु दूसरा सत्य यह भी है कि मैनेजरों के इस बर्ताव के पीछे भी उनके ऊपर बैठे मैनेजर ही होते हैं। उच्च अधिकारियों द्वारा उन्हें लक्ष्य दिए जाते हैं, जिनको पाने के लिए दिया जाने वाला दबाव, उन्हें कई बार अमानवीय व्यवहार करने पर मजबूर करता है। ऐसे में, आपको उन सब चीज़ों का ध्यान रखना पड़ता है जो आपको एक अच्छा मैनेजर बनने से रोकती हैं। इस लेख में मैं आपको ऐसी ही 5 चीज़ों के बारे में बताऊंगा।

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1परिभाषित लक्ष्य का न होना

अब चाहे बात कोई पार्टी आयोजित करने की हो या अंतरराष्ट्रीय व्यापार की, यदि आपको पता है कि आपसे क्या उम्मीद रखी जा रही है अर्थात आपको एक पूरी तरह से प्रभाषित लक्ष्य दिया गया है, तो आपके लिए उस दिशा में आगे बढ़ना आसान हो जाता है।

पर ऐसा अक्सर देखा गया है कि लक्ष्यों को स्पष्ट रूप से परिभाषित नहीं किया जाता। बहुत बार ऐसा होता है कि आपको अपने लक्ष्य के बारे में पता ही नहीं होता और आप किसी ऐसे लक्ष्य को पाने में समय बर्बाद करते रहते हैं, जिसकी आपसे उम्मीद ही नहीं होती।

आपको यह समझने के लिए रोबोटिक्स में डिग्री लेने की ज़रूरत नहीं है कि जब तक आपको पता ही नहीं होगा कि जाना कहां हैं, आप कही नहीं पहुँच पाएंगे।

ऐसे में, आप अपने हिसाब से चीज़ों को करते रहते हैं और अंतिम समय में, उन्हें बिलकुल नए लक्ष्य को पाने के लिए उच्च अधिकारियों के दबाव में आना ही पड़ता है। यही दबाव, वह आगे अपने सहकर्मियों पर डाल देते हैं और चीज़े बिगड़ जाती हैं।

इसलिए, बहुत ज़रूरी होता है कि आप अपने लक्ष्य के बारे में खुल के बात करें। ऐसा करने से आप न केवल अपने लक्ष्य को पहचान पाएंगे, बल्कि उसे सही ढंग से पूरा भी कर पाएंगे। कारगर योजनाबंदी के लिए, लक्ष्य की पूरी समझ होना बहुत जरूरी है। अतः, लक्ष्य को लेकर जितने भी सवाल हों, उनको पूछने में शर्माएं नहीं।

अगर आपको लगता है कि प्रश्न पूछना मूर्खता का संकेत है, तो आप गलत सोचते हैं। हमेशा ध्यान में रखें कि आप अपनी टीम से सही ढंग से तभी काम ले पाएंगे जब आप खुद उस काम को सही से समझ लेंगे।

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2आपका संगठित न होना

हम व्यस्त नहीं होते, अव्यवस्थित होते हैं। मैनेजर के रूप में हम अपना आपा तब खो बैठते हैं, जब हमारे खुद के लक्ष्य या किसी को दिए गए लक्ष्य की प्राप्ति सही समय पर नहीं होती। लेकिन, हम इसके पीछे के कारणों को नज़रअंदाज़ कर देते हैं। ऐसा होने के दो प्रमुख कारण होते हैं –

  1. अस्पष्ट लक्ष्य
  2. उसे पाने का अव्यवस्थित तरीका

जब आप संगठित नहीं होंगे, तो आपको कठिन परिस्थितयों का सामना करना पड़ेगा और इसके परिणामस्वरूप, आपकी काम करने की क्षमता बुरी तरह से प्रभावित होगी। ऐसा होने पर, जो लोग आपके साथ काम करते हैं, वे भी हताश होंगे, और आप वांछित परिणाम नहीं दे पाएंगे।

ऐसा न हो, इसे रोकने लिए आपको निम्नलिखित चीज़ों को ध्यान रखना चाहिए

  1. आपको एक ऐसी रणनीति पर काम करना चाहिए, जिससे आप लक्ष्य प्राप्ति में आने वाली मुश्किलों को पहले से जान पाएं।
  2. वैसे तो ऑफिस में हर काम ज़रूरी है। लेकिन, फिर भी जो काम ज़्यादा जरूरी न हो और स्थगित किए जा सकते हों, उन्हें कुछ समय के लिए स्थगित कर देना चाहिए।
  3. समस्याओं को प्राथमिकता के हिसाब से बांटे अर्थात जिसे हल करना सबसे जरूरी हो, उसे सबसे पहले हल कर लें। कई बार, हम किसी ऐसी समस्या को नज़रअंदाज़ कर देते हैं, जो शुरू में छोटी लगती है। लेकिन, आगे चलकर वही समस्या एक गंभीर रूप ले लेती है और आपको लक्ष्य प्राप्ति से दूर कर देती है।

ऐसा ज़रूरी नहीं है कि हर व्यक्ति जो अव्यवस्थित है, वह कुशल नहीं होता। कई बार आप प्राथमिकताओं को सही ढंग से न समझने की गलती कर बैठते हैं। इसलिए, चीज़ों को सही ढंग से और सही समय पर करने के लिए रणनीति पर काम करना बेहद ज़रूरी है।

3अज्ञात समस्याएं

काम के दौरान ऐसा बहुत बार होता है कि आपको बहुत सी ऐसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है, जो आपके समक्ष एकदम आ जाती हैं अर्थात आपको जिनका अंदेशा भी नहीं होता। ऐसे में, आपको कई बार उस काम को छोड़ना पड़ता है, जो समाप्ति के नज़दीक होता है, और अपनी पूरी ऊर्जा को उस समस्या के समाधान पर लगाना पड़ता है।

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कई बार ऐसा भी होता है कि आप पहले से ही बहुत ज़्यादा व्यस्त होते हैं और आपका अज्ञात समस्या की ओर ध्यान ही नहीं जाता। जब तक आप जान पाते हैं, बहुत देर हो चुकी होती है और आपको भारी नुकसान उठाना पड़ता है।

ज्यादातर समस्याएं इस लिए हल नहीं हो पाती क्योंकि उन पर सही ढंग से निर्णय नहीं लिया जाता। ज़ाहिर सी बात है कि अगर हम समस्या को ठीक से और समय रहते समझने में चूक जाएंगे, तो उसका समाधान कर ही नहीं पाएंगे।

इन सब परिस्थितियों में आपका लक्ष्य से भटकना या निर्धारित समय पर उस तक न पहुंच पाना स्वाभाविक होता है। परन्तु, अगर आप इन समस्याओं को धैर्य से हल करेंगे, तो ऐसा नहीं होगा। ऐसा करने के लिए, आपको चीज़ों को गहराई से समझना और एक सही रणनीति बनाने की ज़रूरत होती है।

4सहकर्मियों से तालमेल की कमी

कई लोगों का मानना है कि मैनेजर का काम, शीर्ष पर रहकर अन्य सहकर्मियों को आदेश देना ही होता है। अगर आप भी मैनेजर हैं, और ऐसा ही सोचते हैं, तो आप बिलकुल गलत सोचते हैं। वास्तव में, मैनेजर एक सेनापति की तरह होता है, जिसे कई बार सहकर्मियों के समक्ष खुद के काम को उदाहरण की तरह भी रखना पड़ता है।

सच्चाई यह है कि कभी-कभी आपको सहकर्मियों को बताना पड़ता है कि क्या करना है और आप किस तरीके से किसी काम को करवाना चाहते हैं। ऐसा ज़रूरी नहीं होता, लेकिन अगर आप उन्हें ठीक से दिशा-निर्देश देंगे, तो वह आपकी उम्मीद पर खरा उतरने का पूरा प्रयास करेंगे। अन्यथा वे आपके निर्देशों का पालन तो करेंगे, लेकिन सर्वोत्तम तरीके से नहीं। नतीजतन, आपको नए निर्देश देने पर समय बर्बाद करना होगा और सभी गलतिओं को खुद से ठीक करना होगा।

ऐसी स्थिति में, न तो आपके अपने सहकर्मियों से रिश्ते मधुर हो पाएंगे और न ही आप एक टीम की तरह किसी लक्ष्य पर पहुँच पाएंगे। अंत में, आपको दबाव का सामना करना पड़ेगा और वह दबाव जब आप अपने सहकर्मियों पर डालेंगे, तो वह तंग आकर नौकरी छोड़ देंगे।

इसके विपरीत, अगर सहकर्मियों को सही दिशा-निर्देश और उदाहरण मिलेंगे, तो वे सब कुछ ठीक तरीके से करेंगे। इसके साथ ही, आप पाएंगे कि वे अधिक उत्साही और उत्पादक हो गए हैं। इसलिए, सहकर्मियों पर नियंत्रण करने से बेहतर है, आप खुद पर नियंत्रण करना सीखें, चीज़ों को सही ढंग से समझें और समझाएं।

5अस्वीकरण

लक्ष्य की विफलता का दोष किसी दूसरे के ऊपर लगाना बहुत आसान होता है। जब चीज़े हमारे हिसाब से काम नहीं करती, तो हम इसका इलज़ाम दूसरों पर डालने में कोई कसर नहीं छोड़ते। कभी-कभी अपनी नाकामयाबी को छुपाने के लिए बहाने भी बनाने लगते हैं अर्थात हर संभव स्पष्टीकरण देते हैं।

परन्तु, ऐसा करना भी हमारी कमियों को और प्रकाशित करता है। खुद की आंखें बंद करने से बाहर भी अँधेरा हो जाएगा, ऐसा सोचना ही हास्यप्रद है। अगर आप एक अच्छे मैनेजर बनना चाहते हैं, तो समस्यायों से भागने की बजाय उन्हें हल करना सीखें। अगर कोई विफलता होती है, तो इसकी ज़िम्मेदारी लेना सीखें। लेकिन, यह सब तब ही हो पाएगा, जब आपका लक्ष्य प्रभाषित होगा और उस लक्ष्य को पाने के लिए आपके पास एक रणनीति होगी।

क्या इस विषय में आपका कोई प्रश्न हैं ? हमारे विशेषज्ञ से ज़रूर पूंछे।

आपको मैनेजर होने के नाते अपने अधिकारों और जिम्मेदारियों को अच्छे से समझना चाहिए। इसके साथ ही, अपने कार्यक्षेत्र की सीमाओं को जानना भी ज़रूरी होता है।

खुद के आचरण एवं काम करने के तरीके को जितना व्यवस्थित रखेंगे, उतना ही आपके लिए प्रबंधन आसान हो जाएगा।

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