7 आसान तरीके जिनसे आप झूठ बोलने वाले व्यक्ति को पकड़ सकते हैं

अगर आपको लगता है कि आपका झूठ पकड़ा नहीं जा सकता, तो आप गलत हैं।

1164
READ BY
Photo Credit: Bigstockphoto
Read this article in English
यह लेख हिन्दी में पढ़ें।
Sukhdeep Singh

Sukhdeep Singh

Write Something To Right Something

Passionate about playing with words. Sukhdeep is a Post Graduate in Finance. Besides penning down ideas, he is an expert online marketing consultant and a speaker.

हम सभी ने हमारे जीवन में कम से कम एक बार तो झूठ बोला ही होगा, चाहे वह जगह हमारा स्कूल हो, विश्वविद्यालय हो या कार्यस्थल हो। हम सभी झूठ के आदि हो चुके हैं। हम सब जानते हैं कि इस राक्षस का पेट भरकर हम कितनी बढ़ी गलती कर रहें हैं, लेकिन फिर भी हम ऐसा करने से नहीं चूकते और जब भी मौका मिलता है झूठी कहानी बना देते हैं।

क्या आपने कभी संदेह किया है कि शायद आपके पति/पत्नी, कर्मचारी या व्यापार भागीदार आपसे झूठ बोल रहे हैं? कभी सोचा है कि कैसे कुछ लोग दूसरों का झूठ मिनट में पकड़ लेते हैं? इस लेख के माध्यम से मैं आपको बताऊंगा ऐसे 7 आसान तरीके जिनसे आप झूठ बोलने वाले व्यक्ति को पकड़ सकते हैं।

मनोवैज्ञानिकों के एक अध्ययन से पता चला है कि किसी के झूठ बोलने पर, हमारा सहज-ज्ञान अर्थात इंट्यूइशन उसे झट से पकड़ लेता है, लेकिन हमारा सचेत मन हमें परिस्थितियों के बारे में सोचने के बारे में मजबूर करता है।

एफ.बी.आई के एक बॉडी लैंग्वेज और व्यवहार विश्लेषण विशेषज्ञ के मुताबिक, यदि आप झूठ बोलने वाले व्यक्ति को पकड़ना चाहते हैं, तो आपको झूठों के व्यवहार को बारीकी से समझना होगा और यह देखना होगा कि किन-किन परिस्थितियों में वह अपना व्यवहार कैसे बदलते हैं। आपको इन व्यवहारों के बदलावों के बीच के अंतरों को ढूंढना है। इसके साथ ही, आपको व्यक्ति की शारीरिक भाषा का विश्लेषण करना, बात करने का लहज़ा, चेहरे के हाव-भाव आदि का विश्लेषण करना सीखना होगा। यह कुछ ऐसे संकेत हैं, जिन्हें आप बातचीत के दौरान आमतौर पर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन अगर थोड़ा सा ध्यान देते हैं तो आप स्पष्ट रूप से झूठे इंसान को पकड़ सकते हैं।

1हाथों की गतिविधियों पर ख़ास ध्यान दें

जब वह इंसान बात कर रहा हो, तो उसके हाथों की गतिविधियों पर ख़ास ध्यान दें। अगर वह इंसान बात करते समय बेकार और निराधार इशारे करता है, आपको इन इशारों का ख़ास ध्यान रखना चाहिए। ऐसे इशारे तब प्रकट होते हैं, जब किसी के कहने और सोचने में फर्क होता है अर्थात सोच कुछ और रहा होता है और बोल कुछ और।

इसके परिणामस्वरूप इशारों का उसके शब्दों से मेल नहीं होता है। साथ ही साथ व्यक्ति के चेहरे के भाव असमान हो जाते हैं, उदाहरण के लिए, चेहरे का एक हिस्सा तनावग्रस्त हो जाता है और शेष भाग मुस्कान दिखाने की कोशिश कर रहा होता है। ऐसे विवरणों पर ध्यान देकर, आप आसानी से झूठ को पकड़ सकते हैं।

जरूर पढ़ेंकामयाब और खुशहाल ज़िन्दगी जीने का तरीका

सोचने और सोचने की नकल करने में फर्क होता है। वैज्ञानिक रूप से, अगर सोचते समय आप ऊपर बाईं तरफ देख रहे होते हैं, तो आप सच में सोच रहें हैं। लेकिन, अगर आप ऊपर दाईं ओर देखते हैं, तो आप सोचने की नक़ल कर रहें होते हैं और नतीजन आप झूठी कहानी बुन रहे होते हैं।

2एकदम जवाब देना या बहुत सोच-सोच कर जवाब देना

अगर आप किसी से प्रश्न पूछते हैं, और वह शख्स बिना सोच-विचार किए तुरंत उसका जवाव देता है, तो यह साफ़ संकेत है कि वह आदमी झूठ बोल रहा है और वह जवाब के साथ पहले से ही तैयार था। आमतौर पर, हमारा दिमाग पहले से ही प्रश्नों के लिए तभी तैयार होता है, जब हम प्रश्नों के बारे में पहले से ही जानते होते हैं अर्थात हमें प्रश्नों की पहले से ही कल्पना होती है। जब आप किसी विशेष प्रश्न का उत्तर देने के लिए तैयार नहीं होते हैं तो उत्तर देने के लिए आपको थोड़ा समय लगता है अर्थात आप सोच-विचार से उत्तर देते हैं और यह वास्तविकता की पुष्टि करता है।

इसी तरह, जब कोई जरूरत से ज्यादा सोच-सोच कर जवाब देता है, तब भी उसके जवाब में सच्चाई नहीं होती। जाहिर है, अगर किसी को अपेक्षित समय सीमा के भीतर सवालों का जवाब देना मुश्किल हो रहा है, तो संभव है कि वह दिमाग में एक कहानी तैयार कर रहा है, और निसंदेह झूठ बोल रहा है।

3कहानी को फिर से शुरू करने में असमर्थता

जब आपको पहले से ही शक है कि कोई कहानी बना रहा है, तो शुरू से ही थोड़ा समझदारी से कार्य करें। ऐसे इंसान को पकड़ने के लिए एक बहुत ही आसान सी तरकीब है। उसकी कहानी को ध्यान से सुनें और कहानी से कुछ तथ्यों को अपने दिमाग में बिठा लें। फिर, कहानी के मध्य में उसकी बात को कोई कहानी बनाकर रोक दें। थोड़ी देर बाद, फिर से उसे एक ऐसे बिंदु से कहानी शुरू करने को कहें, जो आपने दिमाग में बिठा लिया हो।

जरूर पढ़ेंकामयाब और खुशहाल ज़िन्दगी जीने का तरीका

ध्यान से सुनें, और देखें कि क्या इस बार उस तथ्य को लेकर उसकी कहानी में कोई बदलाव आया है? क्या सभी तथ्य वैसे ही क्रम से आ रहें या नहीं? उसे टोकते रहें कि, “पहले आपने कुछ और कहा था और अब कुछ और बता रहे हैं,” भले ही सबकुछ सही क्रम में हो। अगर कहानी में सुधार हुआ है, तो झूठ बोलने वाले को काफी परेशानी और हिचकिचाहट का सामना करना पड़ेगा।

4हाथों से खेलना अर्थात बार-बार मुंह को ढकना

यह सबसे आसान संकेतों में से एक है जिसको ध्यान में रखकर आप बता सकते हैं कि कोई कब झूठ बोल रहा है। आपने यकीनन छोटे बच्चों को देखा होगा, जब वह कोई गलती या बेवकूफी भरी बात करते हैं, तो वे तुरंत अपने हाथों से मुंह को ढक लेते हैं। समय के साथ-साथ आप इस इशारे की गहराई को समझ सकते हैं। वास्तव में यह एक ऐसी प्रक्रिया है, जिससे बच पाना या जिस पर नियंत्रण कर पाना कठिन होता है और स्वाभाविक रूप से झूठ बोलने वाले से यह गलती हो ही जाती है।

5बताई जाने वाली कहानियां हमेशा सटीक होती हैं

यदि आप एक कहानी कह रहे हैं जो कि आपने पहले से ही अच्छी तरह याद कर रखी है, तो गलतियों या तथ्यों के लिए आप कोई संभावना ही नहीं छोड़ते। आप पहले से ही उन चीजों पर काम कर चुके होते हैं, जिनसे आपकी गलती पकड़ी जा सकती है, इसलिए आपकी कहानी में कोई दोष नहीं होता। इसके अलावा, आप अपने आप को पहले से ही कहानी सुनाए जाने के बाद आने वाले सवालों के लिए तैयार कर लेते हैं। इसके विपरीत, अगर आप सच बोल रहें हैं और तथ्यों को साँझा कर रहे हैं, तो आपको चीजों को कुछ हद तक सोचना पड़ेगा और संयोजित करना पड़ेगा क्योंकि आपको समय-समय पर स्वयं को सही करने के लिए समय चाहिए। इसलिए, अगर चीजें एक ही बार में आ रही हैं, तो आपको कहानी सुनाई जा रही है

जरूर पढ़ेंकामयाब और खुशहाल ज़िन्दगी जीने का तरीका

6सरल सवालों के गलत जवाब

झूठ बोलने वाला व्यक्ति सरल प्रश्नों के भी गलत जवाब ही देगा और वह भी बहुत जल्दी से। उदाहरण के लिए – अगर किसी घटना के होने पर आप गुनहगार से पूछेंगे कि वह घटना के समय कहाँ था, तो आप एक निराधार जवाब की उम्मीद कर सकते हैं जैसे कि, “मैंने कुछ नहीं किया है।” इसका मतलब है कि वह व्यक्ति निश्चित रूप से झूठ बोल रहा है और आपके प्रश्नों से बचने की कोशिश कर रहा है। तर्क यह है – जब किसी साधारण से जवाब का उत्तर भी संदिग्ध दिया जाता है, तो इस बात की पूरी संभावना है कि आप झूठ कह रहे हैं।

7आंखों को गौर से देखें

क्या आप आंखों के पीछे का विज्ञान जानते हैं? क्या आप जानते हैं कि जब कोई व्यक्ति अपनी आंखों को बाईं ओर ले जाता है, तो उसका दिमाग अतीत की यादों तक पहुंचने की कोशिश कर रहा होता है। दूसरे शब्दों में, वह आपको कुछ ऐसा बताने जा रहा है जो अतीत में हुआ था और यही सच है। लेकिन, इसके विपरीत, यदि व्यक्ति अपनी आंखों को दाईं ओर ले जाता है, तो इस समय वह कहानी बना रहा है अर्थात उसका दिमाग रचनात्मक केंद्रों को सिग्नल भेज रहा है। दूसरे शब्दों में, वह चीजों की कल्पना कर रहा है और झूठ तैयार कर रहा है।

क्या इस विषय में आपका कोई प्रश्न हैं ? हमारे विशेषज्ञ से ज़रूर पूंछे।

आमतौर पर, ये संकेत सार्वभौमिक होते हैं, लेकिन इनको बहुत ही बारीकी से देखा जाना चाहिए। इन संकेतों का मतलब, यह नहीं है कि व्यक्ति 100% झूठ ही बोल रहा है, लेकिन यह संकेत झूठ बोले जाने की संभावनाओं को उजागर जरूर कर देते हैं।

यद्यपि, इन सब संकेतों को समझ पाना आसान नहीं होता, लेकिन थोड़े से अभ्यास के बाद आप बहुत आसानी से इन्हें पहचानने लगेंगे और अपने जीवन में कभी किसी झूठ की वजह से धोखा नहीं खाएंगे।

Loading...