एकल परिवार और संयुक्त परिवार-फायदे और नुकसान

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मुख्य आकर्षण

  1. एकल परिवार दम्पति को आज़ादी देता हैं।
  2. एकल परिवार में दम्पति एक दूसरे पर निर्भर रहते हैं ।
  3. सयुंक्त परिवार आर्थिक और भावनात्मक मदद प्रदान करता है।
  4. सयुंक्त परिवार सामुदायिक भावना के लिए प्रेरित करता है।

एकल परिवार में जहाँ परिवार सिर्फ दम्पति (पति-पत्नी) और उनके बच्चों तक सीमित होता है, वही दूसरी तरफ संयुक्त परिवार रिश्तेदारों और बुजुर्ग सदस्य यानी की दादा-दादी इत्यादि से भरा हुआ होता है।

अक्सर पूछा जाता है कि संयुक्त परिवार के सम्भवतः कौन से फायदे और नुकसान हो सकते हैं? अगर कोई दम्पति जॉइंट फॅमिली अर्थात सयुंक्त परिवार में नहीं रहना चाहता और वह एकल परिवार के पक्ष में हो अर्थात अपने बच्चों के साथ अलग रहना चाहता हो, तो वह क्या करे या ना करे? क्या सयुंक्त परिवार को छोड़ कर एकल परिवार बना लेना ज़्यादा बेहतर है? आइए, आज हम इसी विषय पर बात करते है कि एकल परिवार और सयुंक्त परिवार में से कौन सा परिवार ज़्यादा उपयुक्त है।

इसको परखने के लिए हम कुछ हालातों को पैमाने के तौर पर ले लेते है।

1निर्णय लेने की आज़ादी और अनुभव का आदान प्रदान

जैसे कि हम जानते है कि एकल परिवार में दम्पति अपने माँ-बाप से अलग रहता है, इसलिए एकल परिवार दम्पति को  निर्णय लेने की आज़ादी देता है। एकल परिवार में किसी भी फैसले पर बड़े-बुजुर्ग सदस्यों की कोई दखल-अंदाजी नही होती। एकल परिवार में दम्पति अपने हिसाब से वह सब नियम, रस्में या परम्पराएं बना सकता है, जिससे परिवार में समृद्धि आए और अन्य सस्दयों को मदद मिले। उनको इस मामले में अपने बुजुर्गो के नक्शे-कदम पर चलने की बिलकुल ज़रूरत नहीं होती।

वही दूसरी तरफ, संयुक्त परिवार में, जहाँ माता-पिता के रूप में एक अनुभवी शादी-शुदा दम्पति होता हैं, वो नए दम्पति को अच्छी सलाह दे सकते हैं| दादा-दादी, चाचा-चाची जैसे अन्य बुद्धिमान और अनुभवी सस्दय, नए दम्पति को उन समस्याओं से जूझने के लिए मदद कर सकते हैं, जिनसे वह सफलतापूर्वक गुज़र चुके हैं।

इसके साथ ही, सयुंक्त परिवार में घरेलु समस्याओं को देखने का नज़रिया भी अलग होता है। सयुंक्त परिवार में, आपको दूसरों का अनुभव मिलता है जिससे आप समस्या को आसानी से और सही ढंग से हल कर पाते हैं। कुछ समस्यांए जैसे कि बच्चे का पालनपोषण, आर्थिक, या वैवाहिक, को सयुंक्त परिवार में सुलझा पाना ज़्यादा आसान होता है।

2बच्चे का पालन पोषण

एकल परिवार में बच्चे का पालन पोषण करना, उन्हें अनुशासित करना आसान होता हैं क्योंकि बच्चे को सभी निर्देश उसके माता-पिता से ही मिल रहे होते हैं। ऐसा देखा जाता है कि सयुंक्त परिवार में अन्य सदस्य कई बार शिशु को परस्परविरोधी निर्देशन देते रहते हैं, जिससे उन्हें अनुशासित करने में  माँ-बाप को समझौता करना पड़ता हैं।

ज़ाहिर सी बात है कि अगर दिशा-निर्देश एक ही तरफ से आएं, तो बच्चे के लिए मानसिक तौर पर कोई परेशानी नहीं होगी। उसे यह समझने में देरी नहीं होगी कि किस के दिशा-निर्देशों को मानना है और किस के नहीं। इसके साथ ही बच्चे को यह भी पता होता है कि गलत व्यवहार करने पर या गलती करने पर उसे सज़ा भी मिलेगी। ऐसे में बच्चा आसानी से माँ-बाप की हर बात मान लेता है और ठीक ढंग से व्यवहार भी करता है।

परन्तु, एकल परिवार में रहने वाले बच्चे अन्य रिश्ते जैसे कि चचेरे भाई-बहन , दादा-दादी, इत्यादि को नहीं समझ पाते। इसी वजह से वह अन्य लोगों से मिलने वाली बुद्धिमत्ता को खो बैठते हैं।

एकल परिवार में रहने वाला बच्चा अपने आपको अकेला महसूस करता है क्योंकि उसके पास सयुंक्त परिवार की तरह खेलने के लिये कोई भाई या बहन नहीं होता।

इसके विपरीत सयुंक्त परिवार में ऐसा नहीं होता। एकल परिवार में कई बार ज़्यादा अनुभव न होने कि वजह से नए माता-पिता भी गलती कर सकते हैं। ऐसे में उनको समझाने वाले अनुभवी सदस्यों की अनुपस्थिति, हालतों को और बिगाड़ देती है। अगर माँ-बाप कोई गलती कर रहे होते हैं, और उसे कोई ठीक करने वाला न हो, तो इसका भी बच्चे के पालन-पोषण पर बुरा असर पड़ता है।

उदाहरण के तौर पर, एकल परिवार में कभी कभी ज़्यादा थके होने की वजह से माँ-बाप शिशुओं को समय नहीं दे पाते और चिढ़ जाते। ऐसे में अपने बच्चों को समय न देकर, वह उनका ध्यान भटकाने के लिए, उन्हें मोबाइल इत्यादि जैसे उपकरण दे देते हैं।

एकल परिवार दम्पति का यह बर्ताव शिशुओं में हीन भावना को जन्म दे सकता है।

दूसरी तरफ अगर सयुंक्त परिवार हो, तो उस वक़्त आप या आपका बच्चा किसी और सदस्य की मदद भी ले सकता है। इससे न केवल आपको ज़रूरी आराम मिलेगा बल्कि आपका शिशु भी मोबाइल जैसे चीज़ पर अपनी ऑंखें ख़राब न करके कुछ बेहतर सीख जाएगा।

3बाहरी दखल अंदाज़ी

एकल परिवार एक ऐसा अलग-थलग दम्पति परिवार होता है , जो कि अन्य रिश्तेदारों की परेशानी से बचना चाहता है। एकल परिवार में सदस्यों की कमी और दखल अंदाज़ी न होने की वजह से दम्पति को एक दूसरे को समझने का ज्यादा वक्त मिलता है।

एक दूसरे के प्रति अच्छी समझ के बाद ही उनमें परस्पर निर्भरता मजबूत होती है। सभी मुसीबतों से लड़ते हुए, हर तरह के वक़्त में वह एक दूसरे का साथ देते रहते हैं और अंत में, उनका रिश्ता एक अटूट रिश्ता बन जाता है।

इसके विपरीत सयुंक्त परिवार में ऐसा नहीं होता। एकल परिवार के निर्माण के लिए अपनी मर्ज़ी से रिश्तेदारों को छोड़ने से परिवार में रहने वाले अन्य रिश्तो पर भी गहरा प्रभाव पड़ता हैं। अलग-थलग हुआ परिवार अपने लोगों से कट जाता है। सयुंक्त परिवार के विपरीत एकल परिवारों में अन्य रिश्तों के लिए मिठास ख़त्म हो जाती है।

4इमरजेंसी में मदद

एकल परिवार में आप किसी को मदद के लिए बुला भी नहीं सकते हैं। उदाहरण के तौर पर नयी माताओं को ही ले लीजिए। एक बच्चे के जन्म के बाद अगर आपके परिवार में पति-पत्नी के इलावा कोई और सदस्य नहीं है, तो आप अंदाज़ा लगा सकते है कि नवजात शिशु को संभालने में आपको किस मुश्किल का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में, संयुक्त परिवार ज़्यादा बेहतर होते हैं।

बच्चे के जन्म के बाद माताए कई प्रकार की समस्यांए जैसे कि डिप्रेशन, थकान, घबराहट इत्यादि से गुज़र रही होती है। ऐसे में अगर आप सयुंक्त परिवार में रह रहीं हों, तो ज़रा सोचिए आपके इर्दगिर्द कितने रिश्तेदार इन समस्याओं से लड़ने में आपकी निश्चित रूप से मदद कर सकते हैं? न सिर्फ आपके नवजात शिशु की देखभाल में, बल्कि आपके खाना बनाने में, एवं घर के अन्य कामकाजो में हाथ बटां सकते हैं।

ऐसी मदद उस वक्त बेहद ज़रूरी हो जाती है जब माँ-बाप में से कोई एक या उनका बच्चा बीमार हो। संयुक्त परिवार में, अन्य रिश्तेदार बीमार व्यक्ति की अच्छी तरह से देखभाल कर सकते हैं।

लेकिन, इसके विपरीत एकल परिवार में ऐसी किसी भी समस्या का मतलब है कि माँ या पिता में से किसी एक को उसकी देखभाली के लिए, ऑफिस से छुट्टी लेना।

लेख का सारांश यह है कि जहाँ एकल परिवार दम्पति को गलतिया करने और उनसे सीखने का मौका देता है, वही दूसरी तरफ सयुंक्त परिवार उन्हें भावनात्मक एवं आर्थिक मुश्किलो में सहारा प्रदान करता है।

अगर आप भी एकल परिवार या सयुंक्त परिवार के चयन को लेकर किसी दुविधा में है, तो आपको इन परिवारों के फायदे और नुकसानों को तौलना होगा। ऐसा करने पर आप तय कर सकेंगे कि आपके और आपके बच्चे के लिए कौन सा परिवार  ज्यादा उपयुक्त हैं।