क्या आप भी मोटिवेशनल लेक्चर सुनकर अपना समय व्यर्थ करते हैं?

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Kumar Sunil

Kumar Sunil

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Creative. One word says it all for Sunil. A engineer, an enthusiastic and conscientious Information Technology consultant by profession, Sunil shares a special interest with entrepreneurship and lifestyle.

कैसा लगेगा अगर मैं आपसे कहूँ कि मोटिवेशनल लेक्चर सिर्फ आपका समय व्यर्थ करते हैं? मोटिवेशनल लेक्चर सुनने मात्र से आपके व्यक्तित्व या जीवन में कोई फर्क आएगा, ऐसा सोचना भी बेवकूफी है। इस लेख के माध्यम से, मैं अपनी इस बात को साबित करूंगा।

मुझे अक्सर लोग कहते हैं कि सैंकड़ों मोटिवेशनल लेक्चर सुनने के बाद भी वह प्रेरित महसूस नहीं करते। इंटरनेट पर अनगिनत वीडियो देखने और लेखों को पढ़ने के बाद भी, उनके जीवन में कोई सुधार नहीं होता। उनका मोटिवेशन स्तर आज भी उतना ही है, जितना इन लेक्चरों को देखने और सुनाने से पहले था। दुनिया की परवाह न करने की सलाह देने वाले वीडियो और लेख, कुछ समय के लिए इनको देखने और पड़ने वाले लोगों को सकारात्मक ऊर्जा से भर भी देते हैं। लेकिन कुछ समय के बाद, इनका असर खत्म होने लगता है, और लोग फिर से पहले जैसे हो जाते हैं। और, अगर ऐसा है, तो मोटिवेशनल लेक्चरों को सुनना, देखना या पढ़ना, समय नष्ट करने जैसा है। क्या आप भी मोटिवेशनल लेक्चर सुनकर अपना समय व्यर्थ करते हैं ?

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मोटिवेशनल लेक्चरों के पीछे छिपी सच्चाई

सबसे पहले मोटिवेशनल लेक्चरों के पीछे छिपी सच्चाई को समझना बेहद ज़रूरी है। असल में यह लेक्चर एक खाली गुब्बारे में भरी गई हवा जैसे होते हैं, जिससे कुछ समय के लिए वह गुब्बारा भरा हुआ सा लगता है, लेकिन हवा निकलने के बाद, फिर से पहले जैसा होता जाता है। आसान शब्दों में कहा जाए, तो गुब्बारे में भरी गई हवा कुछ समय के लिए गुब्बारे को उड़ान दे सकती है, लेकिन थोड़े समय के बाद उसका ज़मीन पर वापिस आ गिरना तय होता है।

मोटिवेशनल लेक्चर भी कुछ ऐसे ही होते हैं। जब आप इनको सुनते, देखते या पढ़ते हैं, तो कुछ समय के लिए यह आपको बहुत प्रभावित करते हैं। आप कुछ समय के लिए खुद को सकारात्मक ऊर्जा से भरा हुआ भी महसूस करते हैं। आपको यह भी लगता है कि अब आपके व्यक्तित्व में फर्क आ गया है और आप पहले जैसे लाचार नहीं हैं। कुछ समय के लिए आप खुद को ख़ास भी महसूस करने लगते हैं और आपको लगने लगता है कि आप से बेहतर इंसान दुनिया में दूसरा कोई है ही नहीं। लेकिन, जैसे ही कुछ दिन बीतते हैं , आप फिर से अपनी पुरानी स्थिति पर आ जाते हैं।

अब आप ही बताइए इतने लेक्चर सुनने, देखने और पढ़ने के बाद भी अगर आपको कुछ दिनों के बाद फिर से अपनी पुरानी स्थिति पर आना ही है, तो इन सब लेक्चरों पर समय बर्बाद करने का क्या फायदा है? अगर आप दूसरों के विश्लेषण के बाद, फिर से टूट जाने वाले हैं, तो दुनिया की परवाह न करने वाले वीडियो को देखने का क्या लाभ है ?

बिना मोटिवेशनल लेक्चर के अपनी ज़िन्दगी कैसे बदलें

क्या आप जानते हैं कि बिना मोटिवेशनल लेक्चर के भी ज़िन्दगी को बदला जा सकता है? मैं यह नहीं कह रहा कि ज़िन्दगी में मोटिवेशनल लेक्चर की कोई ख़ास ज़रूरत होती ही नहीं है। लेकिन , मेरा मानना है कि मोटिवेशनल लेक्चर तब तक कोई बदलाव नहीं लाते, जब तक आप खुद बदलाव के लिए तैयार नहीं होते। खुद को बदलाव के लिए तैयार करने के लिए, आपको अपनी कमियों और ताकतों को अच्छे से समझना होगा। आप में क्या अच्छा है और क्या बुरा, यह आपसे बेहतर कोई नहीं जानता। आप आलसी या व्यस्क होने के बाद भी आप अपने फैसले लेने में समर्थ नहीं हैं, आपकी ऐसी कमियों को बताने के लिए आपको किसी बाहरी व्यक्ति अर्थात किसी मोटिवेशनल प्रवक्ता की ज़रूरत नहीं है। यह आप खुद भी जानते हैं।

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परन्तु समस्या यह है कि आप इन कमियों को जानते हुए भी ठीक करने को तैयार नहीं हैं। आप हर बार इन कमियों से सम्बंधित मोटिवेशनल लेक्चर सुनते हैं, खुद को बदलने की कसम भी खाते हैं। लेकिन, कुछ दिनों के बाद, जैसे गुब्बारे से हवा निकल जाती है, आपके ऊपर से भी इन मोटिवेशनल लेक्चरों का असर ख़त्म हो जाता है।

आपके आसपास के लोग, आप पर इन मोटिवेशनल लेक्चरों का असर नहीं होने देते

दूसरों द्वारा हमारे बारे में दी गई राय, हम में से बहुत लोगों को प्रभावित करती है। ऐसा अक्सर होता है कि इस विषय में मोटिवेशनल लेक्चर सुनने के बाद हमें लगता है कि अब हम इससे निपटना सीख गए हैं। पर वास्तव में ऐसा नहीं होता। जिन लोगों की राय आपको प्रभावित करती है, उनको आपकी कमियों के बारे में पता होता है। वह आपकी उन्ही कमियों को बार-बार छेड़ते हैं और आपको परेशान करते हैं। कोई भी मोटिवेशनल लेक्चर आपको तब तक इससे निपटना नहीं सीखा सकता, जब तक आप खुद इसके लिए तैयार नहीं हैं। इसलिए मैं कहूंगा कि अपनी कमियों को पहचानना और उनको ठीक करना सीखें। जब तक, आप ऐसा नहीं करेंगे, आपके आसपास के लोग इन्ही कमियों के माध्यम से आपको परेशान करते रहेंगे। ऐसे में आप जितने चाहे उतने मोटिवेशनल लेक्चर सुन लें ,आपके व्यक्तित्व पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

अगर आपके पास भी कोई कहानी है, तो हमें लिख भेजें

इसलिए मेरा मानना है कि मोटिवेशनल लेक्चर सुनना, देखना, और पढ़ना तभी फायदेमंद हो सकता है, जब आप इन मोटिवेशनल लेक्चरों में बताए गए समाधानों को अपनाने के लिए खुद को अंदर से तैयार करें।

बिना खुद की तैयारी के, इन मोटिवेशनल लेक्चरों को सुनना, देखना या पढ़ना, समय नष्ट करने जैसा ही होगा।

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