वैवाहिक जीवन को खुशहाल बनाए रखने में सेक्स क्या भूमिका निभाता है?

प्यार + भरोसा + वफादारी + सेक्स = एक खुशाल वैवाहिक रिश्ता

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हमसे अक्सर लोग यह सवाल करते हैं कि उनका साथी (ज़्यादातर मामलों में पति) हर वक़्त सेक्स के लिए उन पर दबाव बनाता है। बहुत सी महिलाओं के मुताबिक सेक्स करना और सेक्स के बारे में ज्यादा सोचना, किसी इंसान के मानसिक संतुलन को दर्शाता है। कई लोगों ने हमसे यह भी कहा है कि सेक्स (अनुपस्थिति या अत्यधिक सेक्स की मांग) की वजह से उनका वैवाहिक जीवन खराब हो रहा है। इस लेख के माध्यम से हम आपको बताना चाहेंगे कि प्यार, भरोसा, वफ़ादारी के साथ-साथ, एक वैवाहिक जीवन को खुशहाल बनाए रखने में सेक्स कैसे एक बड़ी भूमिका निभाता है। इसके अलावा, हम सेक्स से जुड़े कुछ सवालों पर भी चर्चा करेंगे।

पाठकों के प्रश्न

1क्या सेक्स के बारे में (अत्याधिक) सोचना गलत है? कुछ लोग हम समय सेक्स के बारे में ही क्यों सोचते रहते हैं?

भारत में ही नहीं, विदेशों में भी बहुत से लोगों का मानना है कि किसी भी इंसान की सेक्स को लेकर सनक उसे एक कामुक और उत्तेजित व्यक्ति के रूप में प्रस्तुत करती है। बहुत सी महिलाओं का मानना है कि ऐसा केवल पुरषों में होता है। उन्हें लगता है कि सिर्फ पुरुष ही हैं, जो सारा दिन सेक्स के बारे सोचते रहते हैं।

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लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि एक शोध के मुताबिक, जहां आदमी दिन में 19 बार सेक्स के बारे में सोचते हैं, वहीं महिलाएं भी दिन में कम-से-कम 10 बार सेक्स के बारे में सोचती हैं।

शोधकर्ताओं के मुताबिक, सेक्स के बारे में सोचना, काफी हद इंसान के इस विषय से जुड़े विचारों के प्रति जागरूकता पर निर्भर करता है अर्थात जितना इंसान इस विषय को लेकर दुविधा में होगा, उतना ही वह इस विषय के बारे में ज़्यादा सोचेगा।

2क्या सेक्स की अनुपस्थिति या अत्याधिक मांग तलाक का कारण बन सकती है?

जी हाँ। यह सत्य है कि (भावनात्मक) सेक्स की अनुपस्थिति या अत्यधिक सेक्स की मांग, दोनों ही तलाक का कारण बन सकती है। कई ऐसे मामलें देखे जाते हैं, जिनमे सेक्स की अनुपस्थिति की वजह से बात तलाक तक पहुँच जाती है। जहां कई मामलों में पुरुषों को सेक्स की अनुपस्थिति साबित होने पर पत्नी से तलाक मिल जाता है, वहीं महिलाओं को भी अत्यधिक सेक्स की मांग अर्थात यौन उत्पीड़न के आधार पर उनके पति से तलाक मिलने के कई मामले सामने आएं हैं।

क्या आप जानते हैं कि माननीय अदालत ने भी यह स्वीकार किया है कि सेक्स के बिना शादी रक्त के बिना शरीर जैसी है?

3क्या सेक्स सिर्फ शारीरिक जरूरत होती है? साधारण सेक्स और भावनात्मक सेक्स में क्या फर्क है?

जी नहीं। यह एक भ्रम है कि सेक्स सिर्फ शारीरिक जरूरत होती है। शारीरिक जरूरत होने के साथ-साथ यह एक भावनात्मक जरूरत भी होती है। सेक्स के आधार पर वैवाहिक रिश्तों की मधुरता का क्या स्तर होता है, इस विषय पर भी अध्ययन चल रहें है।

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अभी तक जो परिणाम आएं हैं, वह थोड़े हैरान करने वाले हैं। परिणामों के मुताबिक, जिन पति-पत्नी में सेक्स की अनुपस्थिति नहीं है, उनका वैवाहिक जीवन, दूसरों से कही बेहतर होता है। सेक्स को एक हौआ बनाने से बेहतर, यह मान लेना होता है कि सेक्स एक भावनात्मक जरूरत है। एक वैवाहिक जीवन से इसकी अनुपस्थिति का एक कारण पति-पत्नी का भावनात्मक रूप से जुड़े हुआ न होना होता है। ध्यान रखें, वैवाहिक जीवन में सेक्स का मतलब उस सेक्स से है, जहाँ दोनों साथी इस क्रिया में आत्मिक तौर से शामिल हो। अगर एक साथी इसे दूसरे साथी की ख़ुशी के लिए कर रहा है, तो भी इसे अनुपस्थिति ही माना जाता है।

एक जिम्मेदार और स्वस्थ यौन संबंध के लिए अटूट विश्वास, संबंध बनाने में मानसिक और शारीरिक मंजूरी, एवं सुरक्षा के गहरे स्तर की आवश्यकता होती है।

4हफ्ते में कितनी बार सेक्स करना जरूरी होता है?

एक हफ्ते में एक जोड़े को कितनी बार सेक्स करना चाहिए, यह सवाल अक्सर पूछा जाता है। इस विषय में हम यही कहना चाहेंगे कि प्रश्न कितनी बार सेक्स करने का नहीं है, बल्कि भावनात्मक रूप से जुड़ने का है। अगर आप प्रतिदिन बिना अपने साथी की मर्जी के सेक्स करते हैं, तो इससे आपका वैवाहिक रिश्ता मधुर होने की जगह और खराब होने लगेगा। इसके विपरीत, अगर सप्ताह में एक बार भी करते भावनात्मक रूप से जुड़ कर सेक्स करते हैं, तो वह ज्यादा बेहतर होता है।

5सेक्स करने से वैवाहिक रिश्ते कैसे मधुर होते हैं?

एक महिला साथी का यौन व्यवहार एवं पुरुष साथी की भावनात्मक जरूरतें, दोनों आपस में जुड़ी होती हैं। पत्नियों को उनके पति के यौन संबंधों के पीछे के मनोविज्ञान को समझने की जरूरत होती है। इसमें कोई दो राय नहीं है, एक आदमी की यौन जरूरतों को पूरा करना, उसे यह महसूस करवाने के बराबर होता है कि उसका साथी उसे न केवल प्यार करता है, बल्कि उस पर निर्भर भी है।

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बहुत सी महिलाएं यह नहीं जानती कि चाहे अधिकांश पुरुष अक्सर दोस्तों से घिरे रहते हैं, लेकिन वह गंभीर रूप से अकेलेपन का शिकार होते हैं। उनके इसी अकेलेपन को दूर करने के लिए, आपके द्वारा किया गया प्यार एवं संभोग, एक मलम की तरह काम करता है। आप शायद नहीं जानती हैं कि अपने जीवनसाथी से यौन संबंधों को मधुर रखकर, आप उनके आत्मविश्वास को भी बढ़ावा देती है।

हम आपको बताना चाहेंगे कि, “एक पत्नी द्वारा अपने पति को सेक्स के लिए मना किया जाना, एक पति के लिए उसे अस्वीकार करने जैसा होता है। इसके अलावा, अगर आप सिर्फ पति की खुशी के लिए उससे सेक्स कर भी रहीं हैं, तो भी आपके पति द्वारा इसे न ही समझा जाता है।

6वैवाहिक जीवन की मधुरता के लिए भावनात्मक रूप से सेक्स करना क्यों ज़रूरी है?

कोई भी रिश्ता हो, अगर हम भावनातमक रूप से एक-दूसरे से नहीं जुड़े हैं, तो रिश्ते का टूट जाना तय है। अगर कोई जोड़ा, किसी भी कारण से इस भावनात्मक मेल को खो चूका है, तो परिणाम बुरे ही होंगे। ऐसे ही, अगर हम सेक्स की बात करते हैं, तो ऐसे रिश्ते से भावनातमक सेक्स की कल्पना करना भी बेकार है, जहाँ पति-पत्नी भावनात्मक रूप से एक-दूसरे से जुड़े ही नहीं हैं।

जैसा हमने पहले कहा कि अगर आपसी संतुष्टि के बिना सेक्स करेंगे, तो यह बिलकुल वैसे होगा जैसे एक कमजोर टीम के साथ एक तरफा क्रिकेट मैच खेलना, जो पहले से ही आत्मसमर्पण कर चुकी है।

7सेक्स में रूचि के घटने के क्या कारण हो सकते हैं?

अपने जीवनसाथी के लिए वास्तविक भावना की कमी ही, सेक्स में रूचि के घटने की प्रमुख वजह होती है। इसके अलावा कई अन्य कारण भी हो सकते हैं, जैसे कि व्यस्त दिनचर्या, नकारात्मक भावनाओं से घिरे रहना, यौन विकार या कोई अन्य पुरानी स्वास्थ्य समस्या जिसके बारे में आप बात करने से झिझकते हों। ऐसे में, चाहे पत्नी हो या पति, दोनों को अपनी समस्याओं को छिपाने की बजाय, एक दूसरे से खुलकर बात करनी चाहिए। सेक्स संबंधी अपने विचारों और इच्छाओं को (अपने साथी को) खुलकर बताना चाहिए। आसान शब्दों में कहा जाए, तो इस गंभीर समस्या को बातचीत से ही काफी हद तक हल किया जा सकता है।

क्या इस विषय में आपका कोई प्रश्न हैं ? हमारे विशेषज्ञ से ज़रूर पूंछे।

अक्सर लोगों को लगता है कि ऐसे मामलों में सिर्फ तलाक ही एकमात्र समाधान है। लेकिन वह तलाक लेने से पहले उन चीज़ों पर विचार करना अक्सर भूल जाते हैं, जिनकी वजह से तलाक होने तक बात पहुँच जाती है।

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