चाईंनीज़ चीज़े ना खरीदे और घरेलु / स्थानिक उत्पाद को सहयोग दे।

1983
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Say No To Chinese Products & Support Local Products
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Kumar Sunil

Kumar Sunil

Dreamer & Enthusiast

Creative. One word says it all for Sunil. A engineer, an enthusiastic and conscientious Information Technology consultant by profession, Sunil shares a special interest with entrepreneurship and lifestyle.

मुख्य आकर्षण

  1. सरकार प्रतिबंध नही लगा सकती।
  2. हमे ही ना कहना होगा।
  3. अपने देशवासियो की मदद करे।

भले ही, ‘मेक इन इंडिया’ हमारा ताज़ा नारा है, पर जब वस्तुओ की खरीदारी की बात आती हैं, तब हम चीनी चीज़े खरीदने को ही पहल देते हैं। अरे भाई, जेब का सवाल है, वैसे भी फैशन के दौर मैं गारन्टी किसी चीज़ की भी नहीं है।

हम अगर भारतीय बाजार में बेचे जाने वाले सभी वस्तुओ पर गौर करे, तो पता चलेगा की ये सब वस्तुए ‘मेड इन चाइना’ का टैग लेके दुकानों की शेल्फों पर सज के बैठी हुईं हैं। ऐसी कोई भी वस्तु नहीं, जो चाइना की ना बनी हो, जैसे की, खाद, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, यन्त्र, तेल, रासायनिक साम्रगी, लोखंड और स्टील उत्पाद,प्लास्टिक, पेट्रोलजन्य सामग्री, टीव्ही, कपड़े, जुटे, सजावट की रौशनी आदि। क्या आपको पता भी हैं, ये चीनी चीज़े सिर्फ हमारा देशीय बाजार ही नहीं खा रहे हैं, बल्कि हमारी परपम्परा और संस्कृति को भी बर्बाद कर रहे हैं।

इस बर्बादी के जिम्मेदार हमारे जैसे लोग ही हैं। हाल ही मैं जो ‘उरी हमला’ हुआ, उसके पीछे कौन है वो तो हम सबको पता हैं. वो कहावत हैं न, जब चूहा बिल्ली के ऊपर हसता है, तो समझ लेना चाहिए की उसकी बिल पास में ही है।

अब क्या मुझे ये भी बताना पड़ेगा की मैं किस छेद के बारे मैं बात कर रहा हूँ? अगर हम इन चीनी उत्पाद को ना कहे तो ही अच्छा हैं। क्योंकि हम ये बकवास वस्तुए खरीद कर सिर्फ उनकी आर्थिक उन्नति में योगदान नही दे रहे हैं, बल्कि हम अपने ही देशवासियो को मार रहें हैं।

जानिये, क्यों नहीं लगा सकती प्रतिबंध भारत चीनी उत्पादों के आयात पर।

चीनी उत्पाद पहले से ही भारतीय बाजार पर हावी हो चुके हैं। अगर हम आकड़ो पर जाए, तो हम यह देख सकते हैं के चीनी वस्तुओ का आयात कारोबार लगभग $235B का आकड़ा पर कर चुकी हैं।

और ये बढ़ता ही जा रहा हैं। लोग यह भी कहते हैं की, उन्हें अब चीनी वस्तुओ के खरीदारी के लिए अब चीन नहीं जाना पड़ता हैं। यह हमारी सरकार हैं, जो ऐसी बेकार वस्तुओ के विक्री के लिए अनुमति देते हैं।

पर सच्चाई तो यही कहती है की, सरकार चीनी उत्पादों के आयात पर प्रतिबंध / रोक नही लगा सकती, क्योंकि यह ‘वर्ल्ड ट्रेड आर्गेनाइजेशन’ के नियमो के खिलाफ है। और तो और, ये करना इतना आसान भी नहीं है।

जरा सोचिये, अगर भारतीय सरकार इन चीनी उत्पादों पर प्रतिबंध लगा दे, तो वे लोग भी भारतीय उत्पाद पर निर्बंध लगा सकते हैं. नुकसान तो हमारा ही होगा ना!

कड़वी हैं, मगर सच्चाई यही है कि, चीन अपने कुल आयात का केवल 0.8 प्रतिशत भारत से आयात करती है, जबकि भारत अपने कुल आयात का 12.4 प्रतिशत चीन से आयात करती है।

आपको बधाई हो – पाकिस्तानी कलाकारों को सहयोग देने के बाद, हम अपने दूसरे प्रतिस्पर्धी को सबसे अच्छी मदद जो कर रहे हैं। क्या हम अपने देश के प्रति वफादारी सच्ची तरह से निभाते हैं?

क्यों न खरीदे चीनी वस्तुए?

वैसे वजह तो बहुत हैं, पर समय बहुत कम है। मैं सिर्फ इतना कहना चाहूँगा की, चीन ने अबतक लोकतंत्र के प्रति अपना पहला कदम भी नहीं बढाया।

कुछ रिपोर्ट के अनुसार, चीन और अमरीका के बिच का व्यापार घाटा $230B पर है और एक दिन,यह सारे दुनिया को हिला देगा। चीनी इतिहास इस बात का गवाह हैं कि, उनकी सरकार अब तक दूसरे देशो के प्रति अमानवीय व्यवहार करती आ रही हैं।

जरा आप अपनी यादाश्त पर जोर दे, या गूगल पर ढूंढे, की पाकिस्तान की मदद कौन कर रहां है? मैं सिर्फ यही पूछना चाहता हूँ, क्या हम अपना पैसा लोकत्रंत देश जैसे यूरोप, एशिया और तथा अन्य देशो के हाथ क्यों नही दे सकते?

क्यों हम उस देश को सहयोग दे रहे हैं, जो सिर्फ पुरे देश में सिर्फ गन्दगी फैला रहा है, बल्कि अपना घरेलु व्यापार मार रहा है?

अगर मानवीय विचारो से देखा जाय, तो हम उन स्वस्त चीनी करागीरों के पीछे का कारण जान सकते हैं. जरा सोचिये, आपका बच्चा जिस कप से दूध पिता हैं, वही कप एक मासूम चीनी बच्चे ने किन बुरी परिस्थितयो में बनाया है।

हम हमेशा अच्छे गुणवत्तापूर्ण वस्तुओ की खरीदारी के बारे में सोचते हैं, तो इसी हिसाब से ये चीनी वस्तुए नकली होती हैं। क्या हम नकली वस्तुओ के प्रति आकर्षित हुए जा रहे हैं? मुझे तो ऐसा ही लगने लगा है कि हमारी गुणवत्ता को परखने वाली नजर मर चुकी हैं, शायद इसलिए तो हम इन बेकार चीनी वस्तुओ पर निर्भर रहने लगे हैं।

क्या आपको यह भी पता हैं की, चीन दुनिया मैं प्रदूषण फैला रहा है और पूरी मानव प्रजाति को जोखिम में डाल रही है? ऊपर से वो, अपने स्वस्त उत्पादों से स्थानीय कारागीरों को उध्वस्त कर रहे हैं।

उनके अधिकाँश उत्पाद नकल कर और कम गुणवत्ता के बने होते हैं, जिससे हमारे स्वास्थ को हानि पहुच सकती हैं।

हम इसे बदल सकते हैं, पर कैसे?

अगर आप बाहरी दुनिया में झांकेंगे, तो देख सकते हैं कि, वेस्ट फ़िलिपीनी, वियतनाम जैसे कई देशो ने उनके नीचतम दर्जे की वस्तुओ की खरीदारी बंद कर दी हैं. हाल ही में आएं आर्थिक रिपोर्ट के अनुसार, चीन अपना 3.2 ट्रिलियन हिस्सा हफ़्तों में खो चुकी है।

सर्वेक्षण भी यही कहता हैं कि, चीनी वस्तुओ के आक्रमण की वजह से कई लघु उद्योग नष्ट हो रहे हैं. आप उनसे कुछ खरीदने के वक्त बस यही ध्यान में रखे कि, आप ऐसा करके अपने में से एक देशवासी का निवाला छीन रहे है और वो चीन को दे रहे है।

आप चीनी वस्तुओं के बढ़ते आक्रमण को रोक कर स्थानिक कारागिरी को बढावा दे सकते हैं. हां, मुझे मालुम हैं आप क्या कहने वाले हैं, यही न की देशी उत्पाद महंगे हैं। पर क्या आपसे मैं पूछ सकता हूँ की क्या आप अपने बच्चे के लिए वही चीनी दवा लाएंगे, जब की उसी सामग्री से ही बनी हुई देशी दवा यहाँ ज्यादा दाम में बिक रही हो?

देशी उत्पादों को बढावा दे और अपनी सच्ची देशभक्ति प्रकट करे। हम चीनी उत्पादों को बहिष्कृत करके अपने मातृभूमि का भविष्य उज्वल कर सकते हैं। इतना ही नहीं, हम ऐसा करके मानवीयता, पर्यावरण एवं स्थानिक कारागिरी की प्रतिभा को बढा योगदान दे सकते हैं।

क्या आप अभी भी मान नहीं गए? चलिए, अब मैं यह भी बता देता हूँ की- चीन ने यूनाइटेड नेशन में आंतकवाद के मुद्दे पर भारत के खिलाफ वोट दे दिया है और पाकिस्तान को खुले तौर पर समर्थन दिया है।

मुझे पता है कि चीनी सामान का बहिष्कार करना आसान बात नहीं है क्योंकि ये रसोई के कटलरी से लेकर लैपटॉप या मोबाइल फोन तक हर जगह हैं। फिर भी हम घरेलु उत्पादों को खरीदने की पहल तो कर ही सकते हैं या नहीं ?

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